भाजपा नेताओं के विवादित बयान के बाद भाजपा ने भले ही उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया हो, लेकिन अब भी सोशल मीडिया में लगातार इसका विरोध दिखाई दे रहा है। केंद्र सरकार ने भी धर्मनिरपेक्षता का हवाला देकर अरब देशों की नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया है। बावजूद इसके अभी भी कई मुस्लिम देश इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक मामलों को लेकर जब भारत पर कोई सवाल उठता है, तो सरकारें धर्मनिरपेक्षता का हवाला देकर इससे बचने का प्रयास करती हैं। लेकिन आंतरिक मसले पर इसे पूरी तरह से भूल जाती हैं। थोड़े दिन इस पर बहस होती उसके बाद मामला रफा दफा हो जाता।
भाजपा प्रवक्ताओं द्वारा दिए गए विवादित बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ कई देशों ने आवाज उठाई। इसके बाद पार्टी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें निष्कासित कर दिया। पार्टी के इस कदम का कई राष्ट्रों ने स्वागत भी किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर हो या फिर राष्ट्रीय स्तर इस तरह की बातें लोग कुछ दिनों तक याद रखते हैं फिर भूल जाते हैं। लेकिन भारत सरकार को अपने स्तर पर इस पर कोई कार्रवाई जरूर करनी चाहिए। और इस तरह की कार्रवाई उन सभी लोगों पर होनी चाहिए तो जिन्होंने किसी अन्य धर्म के खिलाफ भी बयान दिए हो। इससे पूरे देश में यह संदेश जाएगा की सरकार की नजर में सभी लोग बराबर हैं। अगर भारत धर्मनिरपेक्ष है तो उसका कानून भी धर्मनिरपेक्ष है। अगर हिंदू ने बयान दिया है तो उस पर कार्रवाई हो। मुसलमान ने कोई बयान दिया है उस पर कोई कार्रवाई न हो यह तो संभव नहीं है। जो भी सौहार्द बिगाड़ने का काम करेंगे उन पर सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए।
दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर हिमांशु राय अमर उजाला से चर्चा में कहते हैं कि आज असलियत यही है कि धार्मिक मामलों को लेकर जब भारत पर कोई सवाल उठता है, तो सरकारें धर्मनिरपेक्षता का हवाला देकर बचने का प्रयास करती हैं। लेकिन आंतरिक मसले पर इसे पूरी तरह से भूल जाती है। भाजपा प्रवक्ताओं के विवादित बयान के मुद्दे ने जब विदेश में तूल पकड़ा तो पार्टी ने तुरंत उन्हें निष्कासित करने की कार्रवाई की। लेकिन अगर यहीं मुद्दा भारत के अंदर उठता तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती। थोड़े दिन इस पर बहस होती उसके बाद मामला रफा-दफा हो जाता। यह तो सीधे तौर पर यही हो गया कि घर की मुर्गी दाल बराबर।
दरअसल, एक टीवी डिबेट के दौरान भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा और एक ट्वीट के जरिए प्रवक्ता नवीन जिंदल ने पैगंबर मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद से ही घरेलू स्तर पर इसका विरोध शुरू हो गया था। मामले ने जब तूल पकड़ा तो अरब देशों ने भी इस पर नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी। इन देशों में सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ईरान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान (तालिबान) के बाद दूसरे मुस्लिम देश इंडोनेशिया और मालदीव ने शामिल हैं। इसके अलावा इस्लामी सहयोग संगठन ने भी इस पर आपत्ति दर्ज करा दी।
कई देशों ने इस मसले पर भारतीय राजदूतों को भी तलब किया। दुनिया के प्रमुख मुस्लिम देशों के कड़े विरोध के बाद भाजपा बैकफुट पर आ गई। उसने न केवल विवाद को शांत करने के लिए दोनों प्रवक्ताओं पर निष्कासन की कार्रवाई की बल्कि सरकार में अहम मंत्री पीयूष गोयल की तरफ से भी सफाई पेश की गई। इस बीच आगे ऐसा कोई विवाद नहीं हो, इसलिए भाजपा ने प्रवक्ताओं के लिए गाइडलाइन तय कर दी है। जाहिर है पार्टी जल्द से जल्द इस विवाद को खत्म करना चाहती है।