यूएन के प्रतिबंधों से बचने के लिए हाफिज मोहम्मद सईद ने जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन जैसे संगठन खड़े कर लिए। ये सभी मोहम्मद सईद के फ्रंट एंड ऑर्गनाइजेशन माने जाते हैं। इनके द्वारा हाफिज सईद आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाता रहता है। फलाह-ए-इन्सानियत फाउंडेशन के माध्यम से वह धन जुटाने और दूसरे देशों में आतंकी नेटवर्क बढ़ाने का भी प्रयास करता है। इस संगठन द्वारा किए जाने वाले मानवीय और धार्मिक कार्य केवल लोगों के मन में भटकाव पैदा करने के लिए हैं।
इसका मकसद धन जुटाना, नेटवर्क/स्लीपर सेल बनाना और युवाओं को आतंकवाद में शामिल होने के लिए प्रेरित करना है। फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) ने दिल्ली और हरियाणा के क्षेत्र में आतंकी गतिविधि बढ़ाने के लिए मोहम्मद सलमान को दुबई स्थित मोहम्मद कामरान के माध्यम से हवाला चैनलों के जरिए से भारी धनराशि हस्तांतरित की गई है। मोहम्मद सलमान अन्य आरोपियों के साथ नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं।
ईडी की जांच में पता चला है कि मोहम्मद सलमान को मोहम्मद कामरान के माध्यम से अलग-अलग हवाला संचालकों के जरिए बड़ी रकम मिली थी। सलमान को मिलने वाली धनराशि का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश के जिले में एक मस्जिद के निर्माण के लिए किया गया।
हरियाणा के पलवल और दूसरे राज्यों में गरीब लड़कियों की शादी कराने का काम भी सलमान कर रहा था। इनका मकसद था कि लोगों में अपनी अच्छी छवि बनाकर युवाओं को धीरे-धीरे आतंक के रास्ते पर लाया जाए। जांच से यह भी पता चला है कि सलमान ई-मेल के जरिए दुबई के कामरान को प्राप्त धन की रसीद और निर्माण कार्य की तस्वीरें भेजते थे।