मनोहर परिकर मार्च 2017 में देश के रक्षा मंत्री का पद छोड़कर चौथी बार गोवा के मुख्यमंत्री बने थे। भारतीय राजनीति में मनोहर परिकर की पहचान 'मिस्टर क्लीन' के रूप में होती है। मनोहर परिकर का जन्म 13 दिसंबर 1955 को गोवाल के पास मापुसा में हुआ था। उनका पूरा नाम मनोहर गोपालकृष्णन प्रभु परिकर (Manohar Gopalkrishna Prabhu Parrikar) है। मनोहर परिकर ने 1978 में आईआईटी मुंबई से ग्रेजुएशन किया था। वो देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री रहे, जिनसे आईआईटी से ग्रेजुएशन किया हो।
मनोहर परिकर को 2001 में आईआईटी मुंबई ने विशिष्ट भूतपूर्व छात्र की उपाधि भी प्रदान की थी। 24 अक्टूबर 2000 को वह गोवा के पहली बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन सरकार 27 फरवरी 2002 तक ही चल पाई। 5 जून 2002 को एक बार फिर गोवा के मुख्यमंत्री बने।
साफ छवि ने बनाया था रक्षा मंत्री
मनोहर परिकर के रक्षा मंत्री रहते हुए भारतीय सेना ने दो बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया था। 2016 की चर्चित सर्जिकल स्ट्राइक उन्हीं के कार्यकाल में अंजाम दी गई थी। इससे पहले जून, 2015 को मणिपुर के चंदेल जिले में उग्रवादियों ने हमला कर सेना के 18 जवानों की हत्या कर दी थी। इसके बाद म्यांमार सीमा में भारतीय पैराकमांडो घुसे और उग्रवादियों के दो कैंप तबाह करके आए थे। इस ऑपरेशन में करीब 100 उग्रवादी मारे गए।
शालीन और सरल स्वभाव के नेता परिकर बीमारी में भी काम करते रहे। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बावजूद नाक में ड्रिप लगाए हुए ही ऑफिस जाते थे और नेताओं के साथ बैठक करते थे। गौरतलब है कि उनकी पत्नी भी कैंसर से जंग लड़ते हुए ही जिंदगी की जंग हार गई थीं।
मनोहर परिकर की बहादुरी, जोश और जज्बे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनवरी में बीमारी की हालत में उन्होंने राज्य का बजट पेश किया था। इस दौरान उनकी नाक में ट्यूब डली हुई थी। बजट पेश करने के दौरान उन्होंने कहा था कि मैं अपनी अंतिम सांस तक ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ गोवा की सेवा करूंगा। और हुआ भी ऐसा ही।
बचपन से संघ से नाता
मनोहर परिकर की प्रारंभिक शिक्षा लोयोला हाई स्कूल से हुई थी। इसके बाद उन्होंने मुंबई में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में दाखिला लिया और अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। परिकर छात्र जीवन में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए थे। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए।
1994 में जीते थे पहली बार
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से परिकर को 1994 में गोवा की पणजी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला था जिसमें उन्होंने जीत भी हासिल की थी। 24 अक्टूबर, 2000 में गोवा में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल करते हुए सत्ता तक पहुंच बना ली और परिकर को मुख्यमंत्री बनाया गया। हालांकि मुख्यमंत्री बनने की खुशी परिकर के लिए ज्यादा समय तक नहीं रह सकी क्योंकि निजी जिंदगी में उनका संघर्ष जारी थी। उनकी पत्नी मेघा कैंसर की बीमारी से लड़ रही थीं। एक साल बाद ही उनकी पत्नी का निधन हो गया।