उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने एक टीटीई के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं, विभाग की तरफ से ये फैसला तब लिया गया जब एक अचानक हुई जांच में मिला कि एक मुख्य ट्रेन टिकट परीक्षक ने बिना टिकट वाले यात्रियों को त्योहार के समय में एक प्रीमियम ट्रेन में यात्रा करने की अनुमति दी थी।
ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी- PRO
मामले में एनसीआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, शशि कांत त्रिपाठी ने बताया, ऐसी शिकायतें आई हैं कि टीटीई बिना टिकट वाले यात्रियों को यात्रा करने की अनुमति दे रहे हैं या यात्रियों से ज्यादा पैसे लेकर बिना रसीद दिए पैसे वसूल रहे हैं। इन मामलों की जांच के आदेश दिए गए हैं और ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि रेलवे भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति का पालन करता है।
गुप्त सूचना के आधार पर की गई जांच
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, 29 अक्तूबर को, गुप्त सूचना के आधार पर उत्तर प्रदेश के तुंडला और कानपुर के बीच नई दिल्ली-लखनऊ स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन में एक अचानक जांच की गई। इस दौरान जांच में यह पाया गया कि टीटीई ने कुछ यात्रियों से पैसे लेकर बिना टिकट यात्रा की अनुमति दी थी। मामले में प्रयागराज रेल मंडल के एक अधिकारी ने बताया, हमारे सहायक ट्रैफिक प्रबंधक, दिनेश कपिल को सूचना मिली कि नई दिल्ली-लखनऊ शताब्दी में कई यात्री बिना टिकट यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने अपने वरिष्ठ, डिप्टी चीफ ट्रैफिक मैनेजर अमित सुदर्शन से सलाह लेकर एक टीम बनाई। इस टीम में सहायक वाणिज्य प्रबंधक एके सिन्हा और एक पुरुष और महिला टीटीई भी शामिल थे।
21 लोग बिना टिकट यात्रा पाए गए
जिसके बाद टीम ने तुंडला में ट्रेन में चढ़कर C-11 से C-13 तक की तीन बोगियों की जांच की। C-11 बोगी में 21 लोग बिना टिकट यात्रा कर रहे थे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, 21 लोगों का एक समूह उस दिन यात्रा करने वाला था, लेकिन जब वे नहीं आए, तो टीटीई ने कथित रूप से रिश्वत लेकर उतने ही लोगों को ट्रेन में चढ़ने दिया। जांच दल ने पाया कि C-11 बोगी पूरी तरह से भरी हुई थी। जब सभी यात्रियों से टिकट दिखाने को कहा गया, तो पता चला कि 21 लोग बिना टिकट हैं। जब जांच अधिकारी उन पर जुर्माना लगाने लगे, तो उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने टीटीई को पहले ही 2,000 से 3,000 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से पैसे दे दिए थे।
निरीक्षण के दौरान बोगी से गायब था टीटीई
सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण के समय टीटीई उस बोगी में नहीं था। उसे फोन पर बुलाने पर वह करीब आधे घंटे बाद वहां पहुंचा और उसने कई बहाने बनाए। वहीं ट्रेन के इटावा स्टेशन पर रुकने पर कई बिना टिकट यात्री उतरकर भाग गए। इस पूरी जांच की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है और रिपोर्ट प्रयागराज मंडल मुख्यालय भेजी गई।
एक यात्री से टीटीई ने वसूले अतिरिक्त 1300 रुपये
दूसरे मामले में, एक यात्री ने शिकायत की कि दीन दयाल उपाध्याय और मिर्जापुर स्टेशन के बीच टीटीई ने उससे 1,300 रुपये ज्यादा वसूल किए, जबकि उसने अतिरिक्त किराया टिकट भी नहीं दिया। डीआरएम कार्यालय ने दोनों घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। आरोप सही पाए जाने पर दोषी अधिकारियों को सख्त सजा दी जाएगी।