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Arsh Dalla Extradition: खालिस्तानी आतंकी का कनाडा से प्रत्यर्पण मामला, विदेश मंत्रालय बोला- तेज करेंगे प्रयास

Thu, 14 Nov 2024 09:53 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

Arsh Dalla Extradition: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, हमने 10 नवंबर को मीडिया में खालिस्तान टाइगर फोर्स के प्रमुख अर्श डल्ला की कनाडा में गिरफ्तारी की खबरें देखीं। हमें पता चला है कि मामले को ओंटारियो कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
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रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय / अर्श डल्ला, खालिस्तानी आतंकी - फोटो : ANI
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विस्तार
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कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी अर्श सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला की गिरफ्तारी के बाद भारत अब उसके प्रत्यर्पण की कवायद तेज करने में जुटा है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने जुलाई 2023 में गिरफ्तारी के आग्रह के साथ कनाडा सरकार को अर्श डल्ला के बारे में तमाम जानकारियां मुहैया कराई थी। उम्मीद है कि अब भारत के अनुरोध पर उसे प्रत्यर्पित या निर्वासित किया जाएगा।
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कनाडा में गिरफ्तार किया गया है अर्श डल्ला
इस मामले में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, हमने 10 नवंबर को मीडिया में खालिस्तान टाइगर फोर्स के प्रमुख अर्श डल्ला की कनाडा में गिरफ्तारी की खबरें देखीं। हमें पता चला है कि मामले को ओंटारियो कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। गिरफ्तारी के मद्देनजर हमारी एजेंसियां प्रत्यर्पण अनुरोध पर कार्रवाई आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, कनाडाई प्रिंट और विजुअल मीडिया ने गिरफ्तारी के बारे में व्यापक रूप से रिपोर्ट की है।

50 से अधिक मामलों में घोषित अपराधी है अर्श डल्ला
उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत में अर्श डल्ला के आपराधिक रिकॉर्ड और कनाडा में इसी तरह की अवैध गतिविधियों में उसकी संलिप्तता को देखते हुए उसे भारत को सौंप दिया जाएगा। रणधीर  जायसवाल ने कहा, डल्ला हत्या, हत्या के प्रयास, जबरन वसूली और आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण समेत 50 से अधिक मामलों में घोषित अपराधी है। मई 2022 में उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था।
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भारत ने कनाडा से उसकी गिरफ्तारी का किया था अनुरोध
उन्होंने बताया कि जुलाई 2023 में भारत सरकार ने कनाडा सरकार से उसकी गिरफ्तारी का अनुरोध किया था। हालांकि, इसे अस्वीकार कर दिया गया था। भारत ने डल्ला के संदिग्ध आवासीय पते, भारत में उसके वित्तीय लेन-देन, चल/अचल संपत्तियों, मोबाइल नंबरों आदि के विवरण को सत्यापित करने के लिए पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (एमएलएटी) के तहत कनाडा को एक अलग अनुरोध भी भेजा गया था।
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