नेहरू-गांधी परिवार की कर्मस्थली और जन्मस्थली संगम नगरी यूपी के चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होने जा रही है। कम से कम कांग्रेस के लिए अमेठी और रायबरेली के बाद इलाहाबाद काफी मायने रखता है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पहले ही घोषणा कर चुकी हैं कि 19 नवंबर को इंदिरा गांधी के जन्म शताब्दी समारोह के साथ आनंद भवन से इलाहाबाद में यूपी चुनाव का आगाज होगा। इस बीच इलाहाबाद से जो आवाज उठी, उस पर भी कांग्रेस हाईकमान की मुहर लगती नजर आ रही है और प्रियंका गांधी को यूपी में चुनाव प्रचार की कमान सौंपे जाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। पिछले दिनों लखनऊ में कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पहले ही पार्टी पदाधिकारियों से यह कह चुके हैं कि पार्टी यहां सिर्फ 100 सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य लेकर चल रही है और सभी सीटों पर उसे जीतना है।
इस बीच अंदरखाने से यह खबर भी आने लगी है कि प्रियंका गांधी को यूपी में 200 चुनिंदा सीटों पर प्रचार की कमान सौंपी जा सकती है। प्रियंका को चुनाव प्रचार की कमान सौंपे जाने की मांग सबसे पहले 16 अक्तूबर 2013 को इलाहाबाद से उठी। यह मांग करने वाले पार्टी नेता हसीब अहमद और श्रीश चंद्र दुबे को अनुशासन हीनता में पार्टी से निष्कासन तक झेलना पड़ा लेकिन बाद में दोनों की वापसी हो गई।
धीमे-धीमे लखनऊ और फिर दिल्ली में भी प्रियंका के लिए आवाज उठने लगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वक्त की जरूरत और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की ओर से दी गई सलाह, दोनों ही इस चुनाव में पार्टी के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं और इन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता।
अमेठी और रायबरेली को गांधी परिवार की फेहरिस्त में बाद में जुड़े। पंडित जवाहर लाल नेहरू की कर्मस्थली रही संगम नगरी कांग्रेस के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। इंदिरा गांधी का जन्म भी इसी धरती पर हुआ। ऐसे में प्रियंका गांधी के लिए भी अमेठी और रायबरेली के बाद इलाहाबाद में कांग्रेस को जीत दिलाना पहला लक्ष्य होगा।