सीएम अखिलेश यादव की ओर से इलाहाबाद में यमुनापार इलाके को बुंदेलखंड जैसा राहत पैकेज दिए जाने की घोषणा के बाद प्रशासन ने इसके तहत राहत पैकेट बंटवाने की तैयारी कर ली है। टेंडर भी हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ गिने चुने गरीब परिवारों को ही मिलेगी। वह भी तब, जब सूखा बीत गया और बारिश शुरू हो गई।
योजना थी कि सभी अंत्योदय कार्डधारकों को इसका लाभ मिलेगा। शासन ने इसके लिए अभी सिर्फ एक करोड़ रुपये ही जारी किए हैं और इस रकम से महज नौ फीसदी जरूरतमंदों को ही राहत पैकेट मिल सकेंगे। इलाहाबाद जिले में 88 हजार 108 अंत्योदय कार्डधारक हैं। इनमें से 41 हजार 358 कार्डधारक यमुनापार स्थित करछना, कोरांव, मेजा और बारा तहसील में रहते हैं।
अंत्योदय कार्ड उन्हीं परिवारों को जारी किए जाते हैं, जिन्हें एक वक्त की रोटी भी मुश्किल से मयस्सर होती है। हालांकि जब राहत पैकेट बंटवाने की बात आई तो प्रशासन को 41 हजार 358 कार्डधारकों में कई फर्जी नजर आने लगे। इनकी जांच के लिए आपूर्ति एवं राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम भी गठित कर दी गई। हालांकि इस टीम ने अभी अपनी रिपोर्ट नहीं दी है कि अंत्योदय कार्डधारकों में कितने परिवार राहत पैकेट के लिए पात्र हैं।
शासन ने अभी इसके लिए अभी एक करोड़ रुपये ही जारी किए हैं, सो प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया पूरी करते हुए ठेकेदार को 3736 राहत पैकेट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह संख्या यमुनापार के कुल अंत्यादेय कार्डधारकों की महज नौ फीसदी है। ऐसे में 81 फीसदी कार्डधारकों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिलने जा रही है।
एडीएम वित्त एवं राजस्व राम सहाय यादव का कहना है कि अंत्योदय कार्डधारकों में पात्रों का चयन करने के लिए सर्वे किया जा रहा है। एक-दो दिन में सर्वे रिपोर्ट आते ही पैकेट का वितरण शुरू करा दिया जाएगा। अभी जो रकम मिली है, उससे 3736 पैकेट तैयार किए जाएंगे। बाकी के लिए शासन को अलग से डिमांड भेजी जाएगी।