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सपा-कांग्रेस गठबंधन का पेंच और प्रियंका गांधी की खामोशी

Sat, 18 Feb 2017 11:56 AM IST
बीबीसी हिंदी. कॉम के लिए
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प्रियंका गांधी ने कांग्रेस के गढ़ समझे जाने वाले रायबरेली में 'उत्तर प्रदेश को बाहर से बेटा गोद लेने की जरूरत नहीं' कहकर चुनाव को भावनात्मक मोड़ देने की कोशिश तो की, लेकिन गठबंधन के अंदर सीटों के झगड़े के कारण ज्यादातर वक्त खामोश रहीं।
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शुक्रवार को सोनिया गांधी के क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान अहम मौकों पर उनकी चुप्पी से जाहिर था कि सीटों के झगड़े के कारण सपा-कांग्रेस गठबंधन उनके प्रभाव का भरपूर इस्तेमाल नहीं कर पा रहा।

 सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली और राहुल गांधी के क्षेत्र अमेठी में आने वाली दस विधानसभा सीटों में तीन पर दोनों पार्टियों के अधिकृत प्रत्याशी आमने- सामने लड़ रहे हैं। इनमें से दो गायत्री प्रजापति (अमेठी) और मनोज पांडेय (ऊंचाहार) अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री रहे हैं। कुछ सीटों पर सपा के बागी कांग्रेस प्रत्याशियों के खिलाफ़ लोकदल से लड़ रहे हैं।
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प्रियंका दोनों तरफ के प्रत्याशियों में से किसके लिए मांगेंगी वोट

एक हफ्ते पहले राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने साझा तौर पर दावा किया था झगड़ा सुलझा लिया जाएगा, लेकिन अब तक कोई रास्ता नहीं निकल पाया है।पहले प्रियंका का दौरा वैलेंटाइन-डे को होना था लेकिन इसी असमंजस के कारण टाल दिया गया कि आखिर वे इन सीटों पर खुद को गठबंधन का असली बता रहे दोनों तरफ के प्रत्याशियों में से वोट किसके लिए मांगेंगी और किसे हराने के लिए कहेंगी।

शुक्रवार को रायबरेली के जीआईसी कॉलेज ग्राउंड पर कांग्रेस के मंच पर झगड़े वाली सीटों समेत कांग्रेस के ज्यादातर प्रत्याशी मौजूद थे। राहुल गांधी ने उनका नाम लेकर परिचय कराया, लेकिन वोट गठबंधन को देने को कहा, वोटर हैरत में थे वे किन्हें गठबंधन का उम्मीदवार माने। प्रियंका गांधी ने माला पहनी, हाथ हिलाया लेकिन चुपचाप मंच पर बैठी रहीं।

इस विचित्र स्थिति का जिम्मेदार राहुल गांधी और अखिलेश यादव को माना जा रहा है जिन्होंने आपस में क्रमशः 105 और 298 सीटों की संख्या तो तय कर ली लेकिन ये सीटें कौन सी होंगी ये दो हफ्ते बाद तक तय होता रहा इस बीच कई जगहों पर दोनों तरफ के प्रत्याशियों ने सिंबल लेकर नामांकन कर दिए और पेंच फंस गया। इसी हड़बड़ी में मथुरा की छाता सीट पर सपा प्रत्याशी का नामांकन ही रद्द हो गया।

प्रियंका "यूपी के पहले से दो बेटे हैं राहुल और अखिलेश"

बछरावां विधानसभा (जहां कोई विवाद नहीं है) के महाराजगंज में एक सभा में प्रियंका सिर्फ पांच मिनट बोलीं लेकिन मोदी के खुद को यूपी का गोद लिया बेटा बताने पर भावनात्मक हमला किया। उन्होंने कहा, "आज सुबह मैने टीवी पर देखा पीएम बार-बार बोल रहे थे कि यूपी ने उन्हें गोद ले लिया है। यूपी के पहले से दो बेटे हैं राहुल और अखिलेश , अपने बेटों के रहते कोई किसी बाहरी को गोद क्यों लेगा। मेरे पिता राजीव गांधी ने इस इलाके के लिए बहुत कुछ किया लेकिन बनारस से जीत कर प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने वहां के लिए क्या किया?"

रायबरेली सदर में राहुल गांधी ने भी बेटा पर ही फोकस रखते हुए कहा, "पहले मोदी ने गंगा मां से कहा था बनारस का बेटा हूं। अब कह रहे हैं यूपी का गोद लिया बेटा हूं। मोदी सिर्फ रिश्तों के बारे में सिर्फ बोलना जानते हैं जबकि रिश्ते बोलने से नहीं निभाने से चलते हैं। वे अब पौने तीन साल सरकार चलाने के बाद यूपी के किसानों के कर्ज माफ करने की बात कर रहे हैं जबकि चाहते तो कैबिनेट की मीटिंग से पास कराकर वह पंद्रह मिनट में ऐसा कर सकते थे।"

राहुल गांधी ने कहा, "पिछले लोकसभा चुनाव के बाद मोदी "दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे" फिल्म के हीरो की तरह अच्छाई और अच्छे दिनों की बात करते हुए आए थे लेकिन बहुत जल्दी ही "शोले" के गब्बर सिंह में बदल गए हैं।
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सपा-कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन कराने में रही प्रियंका की अहम भूमिका

प्रियंका गांधी को कुछ अपनी दादी इंदिरा गांधी जैसी दिखने के कारण कांग्रेस का ट्रंप कार्ड और कम से कम इस इलाके में गेमचेंजर माना जाता है जिसके कारण उन्हें राजनीति में लाने और चुनावों में यहां बुलाने की मांग उठती है।

सपा-कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन कराने में प्रियंका की अहम भूमिका थी। राहुल और अखिलेश की ज्यादा सीटों पर दावेदारी के कारण बातचीत शुरुआती दौर में टूट गई थी तब प्रियंका गांधी ने फिर से बात शुरू कराई, लेकिन वे कई सीटों पर दोनों तरफ के उम्मीदवारों के उतरने को नहीं रोक पाईं।

वोटिंग की तारीख सिर पर आने के बावजूद राहुल अखिलेश यह मसला नहीं सुलझा पाए हैं, कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि इस स्थिति से वे नाराज हैं क्योंकि अगर झगड़े के कारण कांग्रेस अपने गढ़ में ही हारती है तो उनके किए-धरे पर पानी फिर जाएगा।
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