देश में कोरोना संकट और कांग्रेस-भाजपा में गरमाती सियासत के बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोधी एस्टेट में केंद्र सरकार द्वारा आवंटित आवास को खाली कर दिया है। उन्होंने आवास से जुड़े दस्तावेज अधिकारियों को सौंप दिए। यह आवास भाजपा के राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी को आवंटित कर दिया गया है।
प्रियंका से जुड़े सूत्रों ने बताया कि वह अभी कुछ दिन गुरुग्राम में रहेंगी और फिर मध्य दिल्ली इलाके के एक आवास में रहने चली आएंगी। सूत्रों का कहना है कि प्रियंका ने मध्य दिल्ली में अपने रहने के लिए जो आवास तय किया है उसकी रंगाई-पुताई और मरम्मत का काम चल रहा है।
गौरतलब है कि केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रियंका से नयी दिल्ली स्थित सरकारी बंगला एक अगस्त तक खाली करने को कहा है। उसकी ओर से जारी आदेश में कहा गया कि एसपीजी सुरक्षा वापस लिए जाने के बाद उन्हें मौजूदा आवास ‘35 लोधी एस्टेट’ खाली करना पड़ेगा क्योंकि जेड प्लस की श्रेणी वाली सुरक्षा में यह आवास सुविधा नहीं मिलती।
बता दें कि उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद व भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी अब नई दिल्ली लोधी एस्टेट स्थित सरकारी बंगले में रहेंगे। यह सरकारी आवास कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा को आवंटित था। केंद्र सरकार ने पिछले दिनों प्रियंका के लिए इस सरकारी आवास का आवंटन रद्द कर दिया था।
एक जुलाई को केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्रालय ने प्रियंका के लोधी एस्टेट स्थित टाइप 6, आवास संख्या 35 को निरस्त करने का आदेश जारी किया था। सोशल मीडिया पर यह पत्र खूब वायरल हुआ।
बलूनी को सितंबर 2019 से कैंसर से ग्रस्त होने पर मुंबई में लंबे समय अपना उपाचार कराना पड़ा। इस वर्ष फरवरी में दिल्ली लौटने के बाद उन्होंने अपने वर्तमान आवास 20, गुरुद्वारा रकाबगंज रोड को स्वास्थ्य कारणों से बदलने की मांग की थी। बलूनी के अनुरोध के आधार पर खाली होने वाले बंगलों की सूची में 35 लोधी एस्टेट बंगला सूचीबद्ध होते ही उन्हें आवंटित कर दिया गया था।
प्रियंका ने भेजा था चाय का आमंत्रण
बंगला खाली करने से पहले प्रियंका ने बलूनी को पत्र लिखकर चाय पर आमंत्रित किया था। लेकिन आमंत्रण को राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी ने पूरी विनम्रता से कुछ वक्त के लिए टाल दिया। उन्होंने प्रियंका को पत्र लिखा कि वह कैंसर के उपचार के बाद दिल्ली लौटे हैं और स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। शीघ्र ही वह पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे तो उन्हें सपरिवार अपने घर पर बुलाएंगे और उन्हें उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को परोसेंगे।