राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल और अशोक हॉल का नाम बदले जाने पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि दरबार की कोई अवधारणा नहीं है, यह केवल शहंशाह की अवधारणा है। दरअसल राष्ट्रपति भवन के प्रतिष्ठित 'दरबार हॉल' और 'अशोक हॉल' का नाम बदलकर गुरुवार को 'गणतंत्र मंडप' और 'अशोक मंडप' किया गया है। ये हॉल विभिन्न औपचारिक समारोहों के आयोजन स्थल हैं।
गुरुवार को संसद से निकलते वक्त प्रियंका ने कहा कि दरबार का हॉल का नाम बदलने के पीछे धारणा काफी दिलचस्प है। यह शहंशाह की अवधारणा है। वहीं कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के अनुसार काम करते हैं। मौजूदा सरकार नाम बदलने में काफी माहिर है। सरकार के पास कुछ करने के लिए नहीं है। इसलिए उन्होंने हॉल के नाम बदल दिए। देश की जनता सब कुछ देख और समझ रही है।
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि सरकार को नाम बदलने का शौक है। सरकार को लगता है कि ऐसा करके वह अपने गौरव को वापस ला रहे हैं। पहले सड़कों और सार्वजनिक स्थानों के नाम बदले गए। अब राष्ट्रपति भवन में नामों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को नाम बदलने के बजाय नए संस्थानों के निर्माण और नामकरण पर ध्यान देना चाहिए।
राष्ट्रपति सचिवालय ने जारी किया बयान
नाम बदलने को लेकर राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से कहा गया कि राष्ट्रपति भवन, राष्ट्रपति कार्यालय और निवास राष्ट्र के प्रतीक हैं और जनता की एक अमूल्य विरासत हैं। बयान में कहा गया, इन्हें जनता के लिए अधिक सुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति भवन के माहौल को भारतीय सांस्कृति मूल्यों और लोकाचार के अनुरूप बनाने के निरंतर प्रयास किए गए। इसी क्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के दो प्रतिष्ठित हॉल 'दरबार हॉल' का नाम बदलकर 'गणतंत्र मंडप' और 'अशोक हॉल' का नाम बदलकर 'अशोक मंडप' किया है।