उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर बरेली से बॉलीवुड होते हुए हॉलीवुड तक का सफर तय कर चुकीं प्रियंका चोपड़ा अगर एक दिन के लिए देश की प्रधानमंत्री बन जाएं, तो क्या करेंगी? यूनिसेफ के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आईं प्रियंका चोपड़ा से amarujala.com की संपादक अलका सक्सेना ने बातचीत की। इस दौरान प्रियंका ने देश के हालात और राजनीति पर बेबाक टिप्पणी की।
सवाल: अगर आपको एक दिन के लिए देश का प्रधानमंत्री बना दिया जाए तो आप क्या करेंगी?
प्रियंका चोपड़ा: एक दिन में तो कुछ नहीं होगा। हमारे प्रधानमंत्री बहुत अच्छे हैं। हमारी कैबिनेट में पूरी योग्यता है कि वो इंडिया को आगे बढ़ाएं। फिर भी अगर मुझसे पूछा जाए तो बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें काम करने की मुझे जरूरत लगती है। पहला तो बेरोजगारों को नौकरी के मौके उपलब्ध कराना। बहुत सारे ऐसे युवा हैं, जो अच्छी शिक्षा लेने के बावजूद नौकरी के अभाव के चलते विदेशों में जाकर काम करते हैं, इसे रोकना होगा। दूसरा, शिक्षा का अधिकार को विभिन्न छात्रवृत्ति कार्यक्रमों के जरिए बढ़ावा दिया जाए, खासकर लड़कियों के लिए, जिससे उनके मां-बाप उन्हें स्कूल भेजें। तीसरी सबसे जरूरी बात, देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दिया जाना चाहिए। जब टैक्सेज दिए जाते हैं तो उनका उन शहरों में रिटर्न भी आना चाहिए।
स्वच्छ भारत अभियान पर भी बोलीं प्रियंका
सवाल: विदेशों में जाकर जब आप देश वापस आती हैं...एक इनिशिएटिव लिया गया है स्वच्छ भारत अभियान...आपको लगता है भारत को इसकी जरूरत है?
प्रियंका चोपड़ा: हां, बिल्कुल जरूरत है। नरेंद्र मोदी जी ने इस अभियान के लिए जिन नौ लोगों को चुना था, उनमें से एक मैं भी थी। मैंने मेरे और मेरे टीम ने अपने पड़ोस में जाकर सफाई की थी। मुझे लगता है कि यह सिविक सेंस की दिक्कत है। लोग महसूस ही नहीं करते की यह क्षेत्र, गांव, शहर, राज्य, देश उनका है। स्वच्छ भारत का मतलब सिर्फ कचरा बाहर फेंकना ही नहीं है बल्कि उस कचरे में कमी लाना भी है।
हरियाणा की बेटियों से की बात
सवाल: आपने आज सुबह हरियाणा की बेटियों से बात की, आप पहले भी ऐसे मुद्दों के लिए काम करती रही हैं। आपको क्या लगता है, उनके जीवन में सबसे बड़ा कन्सर्न क्या है? सबसे बड़ी चिंता क्या है?
प्रियंका चोपड़ा: मुझे लगता है लड़कियों की सबसे बड़ी चिंता यह है, खासकर युवा पीढ़ी की, वह सोचती हैं कि क्या हम लड़कों से कमतर हैं। क्या हमें कम मौके मिलने चाहिए? क्योंकि हमारी सोसाइटी हजारों साल से लड़कियों को यह कहती आ रही है कि लड़कियां तो पराया धन होती हैं। लड़का वंश को आगे बढ़ाता है। लोगों की सोच अब ऐसी ही हो गई है और यह समाज के निचले स्तर तक है। ये तभी बदलेगा जब लोग इसपर बात करेंगे। अपनी बेटियों को आगे बढ़ने का मौका देंगे।
प्रियंका बोलीं- मैं बहुत आशावादी हूं
सवाल: आपने ऐसे ही तीन-चार साल पहले 'अमर उजाला फाउंडेशन' के एक कार्यक्रम में कुछ लड़कियों के साथ बातचीत की थी। अब जब आपने बातचीत की है तो आपको लगता है कि इन लड़कियों की सोच में, जो गांव-देहात में रहती हैं, छोटे शहरों में रहती हैं, इनकी सोच में और इनकी चिंताओं में कुछ अंतर आया है?
प्रियंका चोपड़ा: हां आया है, निश्चित तौर पर आया है। मैं बहुत आशावादी हूं। मुझे उन चीजों पर बात करना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता जो अभी तक हुई ही नहीं हैं। हमें उन मुद्दों पर नजर रखनी चाहिए, जो समाज में हो रही हैं ताकि हमें कुछ बदलाव नजर आए, कुछ उम्मीद नजर आए। आज हर जगह महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात होती है, सरकार, यूनिसेफ, एनजीओ, सभी महिलाओं से जुड़े अभियान चलाने लग गए हैं। मीडिया इस पर बात कर रही है जिससे लोगों की सोच में बदलाव आया है। लोग महिलाओं की क्षमताओं से जुड़े मुद्दे पर बातें करने लगे हैं। पहले तो ये बाते भी नहीं होती थी।