कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे के आरएसएस पर बैन लगाने वाले बयान पर बिहार में सियासी घमासान मच गया है। गिरिराज सिंह और रवि शंकर प्रसाद ने खड़गे पर तीखा पलटवार किया। खरगे ने इंदिरा गांधी और पटेल का उदाहरण देकर अपना बचाव किया। आरएसएस और संविधान की प्रस्तावना पर चल रही बहस के बीच यह बयान राजनीतिक गर्मी बढ़ा रहा है। कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं।
कांग्रेस नेता और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे का आरएसएस पर दिया बयान अब सियासी तूफान बन गया है। खड़गे ने दावा किया था कि अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी, तो आरएसएस पर बैन लगाया जाएगा। उनके इस बयान पर बिहार भाजरा के बड़े नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। खड़गे के बयान की पृष्ठभूमि में आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का हालिया बयान है, जिसमें उन्होंने संविधान की प्रस्तावना से 'धर्मनिरपेक्ष' और 'समाजवादी' शब्द हटाने की वकालत की थी।
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केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने खड़गे पर हमला बोलते हुए कहा कि आरएसएस ने समाज सेवा का जो काम किया है, उसे प्रियंक खड़गे जैसे लोग कई जन्मों तक भी नहीं समझ पाएंगे। उन्होंने याद दिलाया कि इंदिरा गांधी ने भी आरएसएस को दबाने की कोशिश की थी, लेकिन 1977 के लोकसभा चुनाव में उन्हें खुद ही हार का सामना करना पड़ा।
इतिहास का हवाला देकर बचाव
प्रियंक खड़गे ने अपने बयान का बचाव करते हुए खुद इंदिरा गांधी और सरदार वल्लभ भाई पटेल का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद पटेल ने भी आरएसएस पर बैन लगाया था। उन्होंने तर्क दिया कि आरएसएस पर बैन लगाने की बात कोई नई नहीं है, बल्कि इतिहास में भी ऐसा हो चुका है।
रवि शंकर प्रसाद ने दी चेतावनी
पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से सांसद रवि शंकर प्रसाद ने भी प्रियंक खड़गे को घेरा। उन्होंने कहा कि खड़गे से इससे बेहतर बयान की उम्मीद नहीं थी, लेकिन उन्हें अपनी भाषा पर संयम रखना चाहिए और अपनी सीमाओं में रहना चाहिए। प्रसाद ने भी इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने आरएसएस को कुचलने की कोशिश की थी, लेकिन खुद राजनीति से बाहर हो गईं।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
खड़गे के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में गर्माहट बढ़ गई है। भाजपा इसे कांग्रेस की हताशा बता रही है, वहीं कांग्रेस का एक धड़ा इस बयान को सही ठहरा रहा है। खासकर बिहार में भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है, क्योंकि आरएसएस का राज्य में मजबूत जनाधार है।
दत्तात्रेय होसबोले के बयान के बाद पहले ही संविधान की प्रस्तावना को लेकर बहस तेज थी। 'धर्मनिरपेक्ष' और 'समाजवादी' शब्द हटाने की मांग पर कांग्रेस समेत विपक्ष हमलावर है। अब खड़गे के बयान ने इस बहस को और तूल दे दिया है।