जैन ने कहा कि कोल इंडिया नवीकरणीय ऊर्जा, एल्युमीनियम और स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश करने वाली है। उन्होंने कहा कि सीआईएल ने ढाई लाख करोड़ रुपये की निवेश योजनाएं तैयार कर रखी है। उन्होंने कहा कि इन 19 कोयला प्रखंडों के चालू होने पर इनसे हर साल सरकार को 7,000 करोड़ रुपये राजस्व मिलने का अनुमान है। साथ ही 69,000 से अधिक लोगों को नौकरी भी मिलेगी।
कुछ प्रखंड निजी क्षेत्र में अडाणी, वेदांता, हिंडालको और जिंदल (जिंदल पावर) समूहों की कंपनियों को गए हैं। कोयले वाणिज्यक उत्खनन में निजी उद्यमियों को प्रवेश देने के लिए कानून में संशोधन किया गया है तथा सरकार ने कारोबार सुगमता और पर्यावरण संरक्षण के नए प्रावधान किए हैं। खनिज कारोबार अनुमति नियमावली 1960 में संशोधन की जरूरत को भी पूरा किया गया।
2025 तक भारत में कोयले की सबसे अधिक खपत
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) का कहना है कि 2025 तक भारत में कोयले की खपत बढने की सबसे अधिक संभावना है। उसके अनुसार देश में इस्पात , बिजली और सीमेंट की मांग बढने से कोयले की मांग बढ़ेगी।अनुमान है कि 2021 में कोल इंडिया का उत्पादन में 3.8 प्रतिशत बढ़ेगा।