निजी शिक्षण संस्थानों में दाखिले में आरक्षण नियमों का लाभ इस वर्ष से मिलने की उम्मीद कम है। कारण, कानून मंत्रालय ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से आरक्षण बिल लाने से पहले उसे पब्लिक डोमेन में डालने को कहा है। सरकार इसी साल से सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को देशभर के विश्वविद्यालयों में दाखिले में दस फीसदी आरक्षण का लाभ देने जा रही है। इसमें सरकारी के साथ निजी विश्वविद्यालयों को भी शामिल किया जा रहा है।
निजी शिक्षण संस्थानों में अभी तक एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण का फायदा भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में सरकार निजी शिक्षण संस्थानों में दाखिले में आरक्षण के लिए बिल लेकर आ रही है। आरक्षण बिल को सरकार बजट सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में पेश करना चाहती थी। बजट सत्र 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा यानी महज 14 दिन बाकी हैं।
ऐसे में अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय आरक्षण बिल का ड्राफ्ट पब्लिक डोमेन में डालता है तो उसकी आपत्तियों व सुझावों के तहत ड्राफ्ट में बदलाव करना होगा। इस पूरे काम में कम से कम 20 से एक महीने का समय लग सकता है। जबकि मार्च में लोकसभा चुनावों के चलते आचार संहिता लग जाएगी।
आवेदन पत्र जारी होने पर दाखिला नियमों में नहीं हो सकता बदलाव
कई विश्वविद्यालय दाखिले के लिए फरवरी से ही आवेदन पत्र जारी कर देते हैं। आवेदन पत्र जारी होने के बाद दाखिला नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता है। यदि कोई संस्थान आवेदन पत्र जारी होने के बाद नियमों में बदलाव करता है तो उसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है। ऐसे में अब निजी शिक्षण संस्थान चाहें तो ही आरक्षण नियम लागू हो सकता है।