बंदी रक्षकों और बंदियों के बीच विवाद के बाद यूपी के देवरिया का जिला कारागार सुर्खियों में आ गया। हालांकि एसपी प्रभाकर चौधरी की सूझबूझ से कारागार में बड़ा हादसा टल गया, क्योंकि बंदियों ने कुछ योजना ही ऐसी बनाई थी।
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देवरिया जेल में बवाल
- फोटो : amar ujala bureau
सुनियोजित हमले की रुपरेखा में सबसे बड़ी बात यह थी कि जेल अधीक्षक को दौड़ाने के बाद करीब सौ बंदियों ने मेस को अपने कब्जे में ले लिया। दाल, रोटी, चना, चाय सहित अन्य सामान जमीन पर फेंकने के बाद करीब बीस गैस सिलेंडर को अपने कब्जे में ले लिया। सभी सिलेंडरों को गेट नंबर दो के पास रख दिया और बगल में आग लगा दी।
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देवरिया जेल में बवाल
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बंदियों ने बैरकों की सभी दीवारों को तोड़कर ईंटों को इक्कठा कर लिया। पुस्तकालय और अर्धनिर्मित बाथरूम में मौजूद ईट को भी अपने कब्जे में ले लिया था। एसपी जब हमराहियों के साथ जेल में दाखिल हुए तो बदमाशों की मंशा भांप गए। उन्होंने पहले बात करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। बिना समय गवाएं शहर के सटे सभी थानेदारों के साथ अतरिक्त फोर्स को बुला दिया।
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देवरिया जेल में बवाल
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करीब पंद्रह फीट की चार दीवारी फंदकर एसपी ने बदमाशों के चाल की रूप रेखा को पहचान लिया। एसपी को दीवार पर चढ़ा देख अन्य पुलिसकर्मी भी फॉर्म में आ गए। बंदियों की तरफ कई आंसू गैस छोड़े गए लेकिन पछुआ हवा के कारण सबसे अधिक परेशानी पुलिसकर्मियों को हुई। फिर दूसरे तरफ आंसू गैस के गोले दागे गए।
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उपद्रवी गैस सिलेंडरों को आग के हवाले करने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच एसपी, एएसपी, कोतवाल, पीआरओ, भलुअनी और रामपुर कारखाना के थानाध्यक्ष मुख्य गेट पर पहुंचे और उसे खोलने का प्रयास करने लगे, लेकिन ताले के अंदर शातिरों ने कागज डाल रखा था। बाद में उसे खोलकर पुलिसकर्मी गेट के अंदर दाखिल हुए।
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देवरिया जेल में बवाल
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एसपी खुद आगे चल रहे थे बाकी फोर्स पीछे। सभी गैस सिलेंडरों को अपने कब्जे में लेने के बाद पुलिस ने जेल राइटरों की खोजबीन शुरू कराई। उनकी निशानदेही पर उपद्रव करने वालों को चिन्हित किया गया। करीब एक घंटे तक पुलिस विभिन्न बैरकों में रही। बुजुर्ग, विकलांग और बच्चों को छोड़कर पुलिस ने सभी बदमाशों की खातिरदारी की। जेल से निकलने के बाद सभी पुलिसकर्मियों का यही कहना था कि आज कप्तान ने बड़ा हादसा टाल दिया।
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देवरिया जेल में बवाल
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हंगामा कर रहे बंदी जेल के अंदर मीडिया की मौजूदगी में वार्ता करना चाहते थे। लेकिन अपर पुलिस अधीक्षक इसके पक्ष में नहीं थे। उन्होंने कहा कि डीएम से वार्ता कर मामले को सुलझा लें, वरना हम चार सौ हैं। इसी बात से बंदी भड़क गए और उन्होंने कहा कि तुम चार सौ हो तो हम चौदह सौ। निपटकर देख लो। किसी तरह मामला शांत हुआ।
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देवरिया जेल में बवाल
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जेल पर बंदियों से मुलाकात करने के लिए उनके परिवार वाले पहुंचे थे। अचानक हुए बवाल के बाद पूरा जेल पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। हर तरफ पुलिस की गाड़ी और फोर्स की मौजूद थी। तमकुहीराज की राधिका, इंदूदेवी, लीलावती सहित कई महिला निराश होकर लौट गई। पति से मिलने आई एक महिला बेहोश हो गई।
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देवरिया जेल में बवाल
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जेल में पुलिस जब दाखिल हुई तो करीब 11 बंदी पड़े पर चढ़ गए। मशक्कत के बाद उन्हें नीचे उतारा गया। सूत्रों की मानने तो पुलिस के डर से सभी पेड़ पर चढ़ थे। शाम को जिला अस्पताल के डाक्टरों ने करीब पचास लोगों को मेडिकल किया। जिसमें राइटर के साथ बंदी भी शामिल थे। करीब आठ बंदियों के सिरफटने और हाथ टूटने की बात सामने आई है। पुलिस पूरे मामले पर नजर बनाए है।
डीएम, एसपी से बातचीत के दौरान बंदी सभी बैरको में डीटीएच लगाने की मांग रहे थे। उनका कहना था कि जेल से छूटते ही उनकी मुखबिरी हो जाती है। बाहर निकलते ही पुलिस उन्हें पकड़ लेती है। इसके अलावा जेल अधीक्षक बेवज बंदियों को परेशान करते है। उन्हें तत्काल हटाया जाए। जेल में भोजन की व्यवस्था ठीक नहीं है। कुछ चुनिंदा लोगों को मेंस की सुविधा दी जाती है। कैंटीन का सामान दोगुने रेट से बेचा जाता है।