सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के कितने बड़े रिकॉर्डधारी रहे हों परंतु ध्यानचंद की असाधारण प्रतिभा के सामने उनका कद कतई बड़ा नहीं हो सकता। लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस शासन ने 2014 के आम चुनाव के दौरान क्रिकेट के भगवान को रिटायरमेंट के दौरान भारत रत्न के तमगे से नवाज दिया ताकि उसे मोदी लहर के खिलाफ जीत में मदद मिल सके।
कांग्रेस ने भारत रत्न के लिए बड़ी आसानी से ध्यानचंद के मुकाबले सचिन तेंदुलकर को आगे कर एक नए विवाद को जन्म दे दिया था जिस पर आगे चलकर बहस होनी ही थी कि क्या सचिन तेंदुलकर को ध्यानचंद से पहले भारत रत्न मिलना उचित है?
सचिन को इस विवाद में दोषी नहीं ठहराया जा सकता। क्रिकेट के जरिए देश की अथाह सेवा करते हुए उन्होंने भारत का नाम दुनिया में प्रसिद्ध किया है। उनकी क्रिकेट कला पर भी कोई प्रश्नचिन्ह नहीं उठा सकता। लेकिन वह इस मसले पर स्वयं आगे आकर ध्यानचंद का नाम इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए आगे कर सकते थे। ऐसा करते तो मास्टर ब्लास्टर शायद और महान हो जाते।
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इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या सचिन तेंदुलकर से पहले ध्यानचंद को मिलना चाहिए था भारत रत्न?'
पोल के जवाब में हमें कुल 30,160 वोट मिले। इनमें 80.98 फीसदी (24,425 वोट) पाठकों ने हां में सहमति देते हुए माना कि सचिन तेंदुलकर से पहले ध्यानचंद को भारत रत्न मिलना चाहिए था, जबकि 16.38 फीसदी (4,939 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताई है। वहीं 2.64 फीसदी (796 वोट) पाठकों ने इस मुद्दे पर कोई राय जाहिर करने में असमर्थता जताई।