भारतीय जनता पार्टी को पांच राज्यों के चुनाव में मिले जनादेश का जश्न मनाने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने अंदाज में पहुंचे। एक अलग शैली में चलकर प्रधानमंत्री ने सारे ताम-झाम को धता बताते हुए न केवल पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं की मुक्त कंठ प्रशंसा की बल्कि अपने 2014 में संकल्प पत्र प्रस्तुत करने के दौरान दिए भाषण को लेकर दुष्प्रचार करने वालों को कोसा भी। प्रधानमंत्री ने उस दौरान दिए तीनों वक्तव्यों की याद दिलाई और अगले पांच साल का पार्टी नेताओं को मंत्र भी दे दिया।
प्रधानमंत्री ने अगले पांच साल में गरीब को अवसर देने की बात कही। उन्होंने साफ कहा कि इस देश का गरीब किसी से कुछ नहीं चाहता। वह नहीं चाहता कि आप उसे कुछ दे दीजिए। मोदी ने कहा कि उन्होंने एक नए हिन्दुस्तान का अनुभव किया है और वह महसूस कर रहे हैं कि गरीब केवल अवसर चाहता है।
गरीब कहता है कि आप मुझे अवसर दे दीजिए और मेहनत मैं अपने आप कर लूंगा। इसी के साथ उन्होंने मध्य वर्ग को भी जोड़ा और कहा कि जिस दिन गरीब आगे बढ़ जाएगा और उसके पास अपना बोझ उठाने की ताकत आ जाएगी प्रधानमंत्री के अर्थशस्त्र के हिसाब से उस दिन मध्यवर्ग के ऊपर से सारा बोझ(टैक्स, नियम कायदे, मर्यादा वहन, सामाजिक दायित्व समेत) अपने आप हट जाएगा। प्रधानमंत्री ने इसी संकल्प के साथ 125 करोड़ हिन्दुस्तानियों का न्यू इंडिया बनाने का संकल्प ले लिया है। वह सपने को 2022 में आजादी के 75 साल पूरा होने समय तक पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
चले पैदल, उतारे जूते
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चले पैदल
प्रधानमंत्री का काफिला जैसे ही होटल ली मैरेडियन के गोलचक्कर से अशोका रोड की तरफ बढ़ा, वह(प्रधानमंत्री) अपनी गाड़ी से नीचे उतर आए और दोनों तरफ हाथ हिलाकर कार्यकर्ताओं, नेताओं, जनता का अभिवादन करते हुए पैदल चलने लगे। भाजपा मुख्यालय में प्रवेश करने के बाद प्रधानमंत्री का भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, शहरी एवं सूचना प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू, स्वास्थ्यमंत्री जेपी नड्डा समेत अन्य ने अभिवादन किया।
उतारे जूते
संस्कार, मर्यादा और सिद्धांत की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी तथा संघ के प्रचारक रहे प्रधानमंत्री ने लोगों को अपने आचरण की सीख देने की परंपरा का निर्वाह किया। वह पंडित दीन दयाल उपाध्यक्ष की प्रतिमा के सामने गए। प्रधानमंत्री ने जूते उतारे और पूरे मन से माल्यार्पण करने, माला को प्रतिमा पर व्यवस्थित करने के बाद ही आगे बढ़े। इसके बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, राजनाथ सिंह, वेंकैया, नड्डा और अन्य ने पुष्प अर्पित किए।
खास बात यह रही प्रधानमंत्री ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय के प्रति समर्पण श्रद्धा भाव दिखाया। पंडित जी के अंत्योदय के सिद्धांत को अपने संबोधन में शामिल किया। उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि भाजपा अपनी पीढिय़ों को भूली नहीं है। पंडित जी के दर्शन पर ही भाजपा ने अपना आधार बनाया है और वह इसे लेकर आगे बढ़ेंगे।
अपनों को दिलाई याद
प्रधानमंत्री ने सत्ता को जनता की सेवा का अवसर बताते हुए फलदार पेड़ की तरह व्यवहार में नम्रता लाकर काम करने पर जोर देने का संदेश दिया। उन्होंने दुष्प्रचार फैलाने वालों को अपने पुराने कथन को याद करके ताकीद किया। प्रधानमंत्री ने जनता को भरोसा दिया कि पार्टी के तमाम चुनकर आए विधायक नए, अनुभव और पहचान में कमजोर हो सकते हैं, लेकिन वे जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की भरपूर कोशिश करेंगे। इसी वक्तव्य के साथ उन्होंने खुद के बारे में बुरा सोचने वालों को नसीहत दी।
तीन बातें रखिए याद
प्रधानमंत्री ने ताकीद करते हुए कहा कि 2014 में लोकसभा चुनाव का संकल्प पत्र(घोषणा पत्र) जारी करते हुए कुछ कहा था। जिसे गलत तरीके और गलत अर्थों में से प्रचारित किया गया। इस तरह से फैलाया गया, ताकि कभी कोई दोबारा ऐसा करने का साहस न कर सके। लेकिन हमने(प्रधानमंत्री और उनकी टीम) 2014 के बाद से ऐसा प्रयास किया है कि वह इसे दोहराने का साहस कर पा रहे हैं। वह तीन बाते हैं जो मैने कही थी।
1. मैने कहा था कि हम नये हैं, अनुभव भी कम है(कभी संसद के सदस्य नहीं रहे, केन्द्र सरकार में काम नहीं किया)। इसलिए हमसे गलती हो सकती है, लेकिन गलत इरादे से कोई काम नहीं करेंगे।
2. प्रधानमंत्री ने कहा हमने कहा था कि हम परिश्रम की पराकाष्ठा करेंगे और आज हमें खुशी होगी है जब लोग कहते हैं कि आप प्रधानमंत्री होकर इतना कार्य क्यों करते हैं।
3. मोदी ने तीसरी बात बताई और कहा कि जो भी करेंगे प्रमाणिकता के साथ करेंगे।
तीन बार दिया टीम शाह को धन्यवाद
प्रधानमंत्री के संबोधन में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के लिए अगाध प्रेम बार-बार झलक रहा था। कुछ समय के संबोधन में प्रधानमंत्री ने पांच राज्यों की जनता के साथ-साथ तीन बार टीम अमित शाह को हृदय के अंत:स्थल से आभार व्यक्त किया।