लोकसभा चुनावों की घोषणा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 राज्यों में 100 रैलियां करेंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बीते आम चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान करीब 5000 रैलियां और कार्यक्रमों में शिरकत की थी, लेकिन पीएम पद संभालने के बाद समयाभाव के कारण वह इस बार इतनी व्यापक रैलियों और अन्य कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। इसलिए पार्टी ने आम चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले यह रणनीति बनाई है।
रैलियों का सिलसिला बृहस्पतिवार को पंजाब के गुरदासपुर और जालंधर से शुरू होगा। इस क्रम में पीएम 22 जनवरी को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में होंगे तो 24 जनवरी को कुंभ में शिरकत करने प्रयागराज जाएंगे। इन सौ रैलियों का तानाबाना ऐसे बुना गया है कि एक रैली तीन से चार संसदीय क्षेत्र में असर डाले। इसके लिए संभावित राज्यों को इसी हफ्ते रैलियों की रूपरेखा तैयार करने का जिम्मा दिया गया है।
जबकि चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी की येाजना सभी प्रभाव वाली सीटों पर रैलियां कराने की है। पिछला चुनाव जीतते ही पार्टी ने अपने विस्तार के लिए समुद्र तटीय राज्यों का चयन किया था। इनमें तमिलनाडु में सियासी तस्वीर अभी साफ नहीं है। मगर पार्टी को ओडिशा और पश्चिम बंगाल से बेहद उम्मीदें हैं। यही कारण है कि पीएम 5 जनवरी को ओडिशा के दौरे पर होंगे, जबकि पश्चिम बंगाल इकाई से रैलियों की तत्काल रूपरेखा तैयार करने के लिए कहा गया है।
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान पर भी खास ध्यान
हालिया विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद भाजपा ने मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान पर भी खास ध्यान दिया है। बीते चुनावों में इन राज्यों में पार्टी को 90 फीसदी सीटें मिली थी। पार्टी के रणनीतिकारों के मुताबिक विधानसभा चुनाव के दौरान भी पीएम के खिलाफ इन राज्यों में कोई नाराजगी नहीं थी। पार्टी इसे स्थिति को इन राज्यों में बनाए रखना चाहती है।