राष्ट्रीय बैंकों से करोड़ों रुपये का लोन लेने वाले कई सौ डिफॉल्टर हर माह भारत को टाटा बाय-बाय बोल रहे हैं। वजह, सरकार इन डिफॉल्टरों का नाम सार्वजनिक नहीं कर रही। ये इसी का फायदा उठाते हैं और आसानी से देश छोड़कर दूसरे मुल्क में चले जाते हैं। दा ऑल इंडिया बैंक ऑफ़िसर्ज कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) का आरोप है कि बैंकों के करोड़ों रुपये डकारकर विदेश जा रहे इन लोगों का पासपोर्ट भी जब्त नहीं किया जा रहा है।
इसके विपरित, सरकार बैंकों का गैर निस्पंदकारी संपतियां (एनपीए) बढ़ने की सजा बैंक अफसरों को दे रही है। एआईबीओसी का कहना है कि सरकार ने 6049 अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जो सूची तैयार की है, उसके खिलाफ देशभर के बैंक अफसर बजट सत्र के दौरान संसद मार्च करने की तैयारी कर रहे हैं।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या देश के बैंक अपने नुकसान की भरपाई के लिए आम जनता से रकम वसूल रहे हैं?'
पोल के जवाब में हमें कुल 3773 वोट मिले। इनमें 87.23 फीसदी (3291 वोट) पाठकों ने माना कि देश के बैंक अपने नुकसान की भरपाई के लिए आम जनता से रकम वसूल रहे हैं। जबकि 13.01 फीसदी (491 वोट) पाठकों ने माना कि देश के बैंक अपने नुकसान की भरपाई के लिए आम जनता से रकम नहीं वसूल रहे हैं।