प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन से फोन पर बातचीत की। इस दौरान पश्चिम एशिया की हालात पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। इस बातचीत में क्षेत्र में शांति और स्थिरता की शीघ्र बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-नीदरलैंड संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा की। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट में कहा, "आज नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन से बात करके मुझे खुशी हुई। हमने भारत-नीदरलैंड संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।"
नीदरलैंड के साथ किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर, मेगा वाटर प्रोजेक्ट्स, ग्रीन हाइड्रोजन और टैलेंट मोबिलिटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "हमने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और क्षेत्र में शांति और स्थिरता की शीघ्र बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया।"
पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने कई विश्व नेताओं से बात की है। इनमें सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, ईरान, फ्रांस, इस्राइल और मलयेशिया के नेता शामिल हैं।
ईरान युद्ध से गहराया ऊर्जा संकट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पीएम मोदी से बात की, जिसके बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर उनके बीच विचारों का उपयोगी आदान-प्रदान हुआ। इस संघर्ष की शुरुआत अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से हुई। इसके जवाब में ईरान ने अपने पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इस्राइल को निशाना बनाया।
इस युद्ध के छिड़ने के बाद से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बढ़ा दिया है। यह एक महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा का परिवहन होता है। संघर्ष के बाद से ईरान ने बहुत कम जहाजों को इसे पार करने की अनुमति दी है।
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