भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बयान के विरोध में बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने लोकसभा की एक संसदीय समिति से इस्तीफा दे दिया था। इस समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे हैं। सस्मित पात्रा ने इस्तीफा देते हुए कहा था कि मैं ऐसे व्यक्ति के साथ काम नहीं कर सकता, जो स्वतंत्रता सेनानी बीजू बाबू का अपमान करे।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को बीजू पटनायक पर कथित अपमानजनक टिप्पणी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनके मन में पूर्व ओडिशा मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के प्रति हमेशा सम्मान रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां पटनायक के खिलाफ नहीं, बल्कि केवल नेहरू-गांधी परिवार और कांग्रेस के कार्यों को लेकर थीं।
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दुबे ने कहा कि उन्होंने केवल ऐतिहासिक संदर्भ में अपनी बात रखी थी और अगर किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे अपनी स्थिति स्पष्ट करने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश में लोगों को क्षेत्र और जाति के आधार पर बांटने की प्रवृत्ति एक बड़ी समस्या है।
क्षेत्र और जाति पर आधारित सोच पर बोले निशिकांत?
निशिकांत दुबे ने कहा कि देश की सबसे बड़ी समस्या लोगों को क्षेत्र और जाति के चश्मे से देखने की प्रवृत्ति है। उन्होंने तर्क दिया कि महान हस्तियों को भी संकीर्ण पहचान तक सीमित कर दिया गया है। उन्होंने कहा, ''क्या बीजू बाबू बिहार के लिए भी गर्व का विषय नहीं थे? 1936-37 में जब ओडिशा को बिहार से अलग किया गया था, तो क्या इसका मतलब यह है कि वह बिहार के लिए भी गर्व का स्रोत नहीं हैं?"
कैसे बढ़ा विवाद?
उन्होंने आगे कहा कि "आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि बंगाल के पहले मुख्यमंत्री बिधान चंद्र रॉय का जन्म पटना में हुआ था। वह बिहारी थे।" यह विवाद तब बढ़ा, जब बीजू जनता दल (बीजेडी) ने राज्यसभा में दुबे के बयान के विरोध में वॉकआउट किया। पार्टी के नेता सस्मित पात्रा ने आरोप लगाया कि दुबे ने बीजू पटनायक को सीआईए एजेंट बताया, जिसे उन्होंने अपमानजनक और अस्वीकार्य बताया।
दुबे ने 27 मार्च को एक बयान में दावा किया था कि 1960 के दशक में चीन के खिलाफ युद्ध के दौरान बीजू पटनायक पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और सीआईए के बीच की कड़ी थे।
नवीन पटनायक ने भी की बयान की आलोचना
इस मामले में बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दुबे के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान बेहद आपत्तिजनक हैं। बता दें कि बीजू पटनायक ओडिशा के दो बार मुख्यमंत्री रहे और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भी उनकी पहचान रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं।