प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत जून के पहले हफ्ते में मालदीव यात्रा के साथ कर सकते हैं। नई दिल्ली और माले के सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
भारत के पड़ोस में मालदीव ही एकमात्र ऐसा देश है जहां प्रधानमंत्री मोदी अपने पहले कार्यकाल के पांच वर्षों के दौरान नहीं गए थे। वे सिर्फ राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए नवंबर में माले गए थे।
हालांकि नई दिल्ली में अधिकारियों ने पीएम मोदी के इस दौरे की पुष्टि करने से इनकार कर दिया, लेकिन ऐसे संकेत हैं कि इसका एलान अगले हफ्ते होगा। बता दें कि मालदीव हमारा सबसे नजदीक का हिंद महासागरीय क्षेत्र का देश है और भारत की सामुद्रिक क्षेत्र से सुरक्षा को देखते हुए काफी अहम स्थान रखता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पड़ोसी देशों में सबसे पहले साल 2014 में भूटान का दौरा किया था। उन्होंने हिमालयी देश के साथ भारत के करीबी संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए यह यात्रा की थी। प्रधानमंत्री मोदी इस बार भी कई पड़ोसी देशों की यात्रा कर सकते हैं। जिससे भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' की नीति को सुदृढ़ किया जा सके।
मालदीव जाने का निर्णय भारत की हिंद महासागर नीति के बारे में संकेत देना है। यह क्षेत्र देश के सुरक्षा के लिए बहुत अहमियत रखता है।
भारत और मालदीव
मालदीव द्वीपों का देश है। केरल के समुद्र तट से 250-300 मील की दूरी पर इसकी सीमाएं शुरू हो जाती हैं। यह 26 द्वीपों का समूह है और दो-ढाई घंटे की हवाई यात्रा से यहां पहुंचा जा सकता है। सामरिक दृष्टिकोण से मालदीव का काफी महत्व है।
यहां से हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय समुद्र तटों तक सीधी निगरानी रखी जा सकती है। इसलिए भारत और मालदीव का रिश्ता रणनीतिक दृष्टि से हमेशा से महत्व का रहा है। भारत हमेशा मालदीव को युद्धपोत, हेलीकाप्टर, रेडार आदि सहायता भी देता आया है। चीन की तरफ मालदीव का झुकाव भारत की कुछ प्रमुख चिंताओं में से एक रहा है।