बता दें कि संक्रमण के कारण इस बार जी-20 शिखर सम्मेलन ऑनलाइन आयोजित हो रहा है, जहां विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष व्यक्तिगत रूप से नहीं बल्कि ऑनलाइन माध्यम से सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
सलमान ने अपने संबोधन में कहा, 'यह हमारा कर्तव्य है कि इस चुनौती के खिलाफ इस सम्मेलन में हम एकजुट हों और उम्मीद तथा पुन: भरोसे का संदेश दें।' सलमान ने कहा, 'कोविड-19 महामारी एक अप्रत्याशित सदमा जैसा है जिसने बहुत कम समय में पूरी दुनिया को प्रभावित किया है और वैश्विक आर्थिक और सामाजिक हानि पहुंचाई है।'
सऊदी अरब इस वर्ष जी-20 का अध्यक्ष है और इस वर्चुअल शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसमें विश्व के सर्वाधिक संपन्न और सर्वाधिक विकसित अर्थव्यवस्था वाले देश जैसे अमेरिका, चीन ,भारत, तुर्की, फ्रांस, ब्रिटेन, ब्राजील सहित अन्य देशों के नेता शिरकत कर रहे हैं।
इस दौरान जी-20 के नेताओं ने सूचनाओं को साझा करने, शोध के लिए जरूरी सामग्री को साझा करने, क्लीनिकल आंकड़े साझा करने और स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने का प्रण लिया। देशों ने संक्रमण से बचाव का टीका विकसित करने के लिए धन जुटाने के वास्ते भी मिल कर काम करने का वादा किया।
सलमान ने जी-20 के नेताओं से विकासशील देशों को समन्वित तरीके से सहयोग देने की भी अपील की। वहीं, अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शिखर सम्मेलन को संबोधित कर सकते हैं।
जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और सऊदी अरब के शाह सलमान से फोन पर बात की। राष्ट्रपति कार्यालय ने शनिवार को यह जानकारी दी। बयान के मुताबिक फोन पर बातचीत के दौरान नेताओं ने दोनों देशों के संबंधों को सुधारने पर चर्चा की।
उल्लेखनीय है कि इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के महा वाणिज्य दूतावास के भीतर वर्ष 2018 में सऊदी पत्रकार जमाल खाशोगी की हत्या के बाद से तुर्की और सऊदी अरब के रिश्ते तेजी से खराब हुए। रिश्तों में कड़वाहट की एक वजह तुर्की द्वारा मुस्लिम ब्रदरहुड का समर्थन किया जाना भी है, जिसे सऊदी अरब आतंकवादी संगठन मानता है।
तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा, 'राष्ट्रपति एर्दोआन और शाह सलमान द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने और मुद्दों के समाधान के लिए बाचतीत के रास्ते को खुला रखने पर सहमत हुए हैं।'