राष्ट्रपति भवन में पीएम मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की 11वीं बैठक हुई, जिसमें सभी 28 राज्यों के सीएम शामिल हुए। बैठक में 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य, रोजगार के लिए नए जमाने के कौशल विकास, रूफटॉप सोलर ऊर्जा और परमाणु शक्ति की सुरक्षा पर गंभीर चर्चा की गई।
देश को साल 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने के संकल्प के साथ राष्ट्रपति भवन में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बेहद महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस महामंथन में देश के सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल और प्रशासक शामिल हुए। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसमें हुए प्रमुख फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुबह 10 बजे शुरू हुई यह बैठक शाम साढ़े छह बजे तक चली, जिसमें समावेशी मानव विकास और देश की आर्थिक-सामाजिक उन्नति को लेकर गहन चर्चा की गई।
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रोजगार और कौशल विकास पर जोर
बैठक के बारे में जानकारी देते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों ने रोजगार के मुद्दे पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल विकास सबसे ज्यादा जरूरी है। उपाध्यक्ष के मुताबिक, उद्योगपतियों की अक्सर यह शिकायत रहती है कि उन्हें बाजार की जरूरत के हिसाब से हुनरमंद लोग नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम 1990 या 2000 के दशक की पुरानी तकनीकों के भरोसे नहीं बैठ सकते। जैसे-जैसे तकनीक बदल रही है, हमें नए हुनर सीखने होंगे। इसके लिए आईटीआई और इंजीनियरिंग कॉलेजों जैसे संस्थानों को उद्योगों की मांग के हिसाब से तालमेल बिठाना होगा।
मानव विकास और जापान का उदाहरण
इस बार की बैठक का मुख्य एजेंडा विकसित भारत 2047 के लिए समावेशी मानव विकास था। उपाध्यक्ष ने बताया कि इसमें इंसान के बचपन से लेकर बुढ़ापे तक के चारों चरणों, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और वृद्धावस्था पर बारीकी से चर्चा हुई। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए एक बेहद दिलचस्प बात कही। उन्होंने बताया कि मेइजी बहाली के दौरान जापान की तरक्की तब शुरू हुई थी, जब वहां साक्षरता दर 40 प्रतिशत तक पहुंची थी। वहीं, भारत में आज साक्षरता दर पहले ही 70 प्रतिशत से ऊपर जा चुकी है। ऐसे में एक साक्षर, स्वस्थ और शिक्षित आबादी ही देश की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। सभी राज्यों ने अपनी-अपनी योजनाओं को इस मंच पर साझा किया।
पश्चिम बंगाल और ऊर्जा संकट पर मंथन
बैठक में पश्चिम बंगाल को लेकर पूछे गए सवाल पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वहां के इतिहास का हवाला देते हुए मदद की बात जरूर उठाई, लेकिन इस पर कोई बहुत विस्तृत या ठोस चर्चा नहीं हुई। उन्होंने याद दिलाया कि वह खुद सात मई तक पश्चिम बंगाल से विधायक थे। इसके अलावा, बैठक में बिजली की कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा पर लंबा मंथन हुआ। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों ने घरों, स्कूलों और अस्पतालों की छतों पर सोलर पैनल लगाने पर जोर दिया, ताकि ग्रिड पर निर्भरता और सब्सिडी का बोझ कम हो सके। कई सदस्यों ने यह भी कहा कि तकनीक बदलने के कारण अब परमाणु ऊर्जा पूरी तरह सुरक्षित है और हमें चेरनोबिल जैसी घटनाओं से डरने की जरूरत नहीं है।