प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकतंत्र की गरिमा और मर्यादा को बखूबी समझते हैं। संसद भवन में भले ही लद्दाख में चीन के तनातनी पर रक्षा मंत्री ने वक्तव्य दिया हो और चर्चा तथा प्रश्नोत्तरी से सरकार बची हो, लेकिन केंद्र सरकार देश के राजनीतिक दलों को विश्वास में लेने की अपनी जिम्मेदारी निभाएगी। उच्च पदस्थ सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री जल्द ही संसद के राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं।
सूत्र बताते हैं कि चीन के साथ तनाव का मुद्दा गंभीर है। यह राष्ट्रीय एकता, अखंडता, संप्रभुता तथा राष्ट्रीय हितों से जुड़ा है। इसलिए प्रधानमंत्री इसके बारे में राजनीतिक दलों को सरकार द्वारा किए गए प्रयासों, ताजा स्थिति आदि की जानकारी के लिए जल्द ही एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर सकते हैं।
यह बैठक मीडिया और किसी सार्वजनिक फोरम से अलग बंद कमरे में होने की संभावना है। एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि देश के सामने कई ऐसे ज्वलंत मुद्दे होते हैं, जिन पर सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी करने या चर्चा से बचना चाहिए। सूत्र का कहना है कि चीन के साथ लद्दाख में जारी तनाव का मुद्दा कोई साधारण मामला नहीं है। इसलिए एक संवेदनशीलता को समझने की आवश्यकता है।
हालांकि अभी यह पता नहीं चल सका है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह बैठक कब बुलाएंगे। इसमें राजनीतिक दलों को आमंत्रित करने के लिए क्या मानक रहेगा, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि यह बैठक इस सप्ताह के अंत तक संपन्न हो जाएगी।
समझा जा रहा है कि लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के साथ लद्दाख में जारी तनाव को लेकर विस्तार से जानकारी दी, लेकिन इसी संवेदनशीलता के कारण केंद्र सरकार ने कोई सवाल नहीं लिए। लोकसभा अध्यक्ष के आसन से भी इस विषय पर किसी को कुछ बोलने या कहने की अनुमति नहीं मिल पाई।