इसके जवाब में सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने दिशानिर्देश को उचित ठहराया था। उन्होंने कहा था कि फेक न्यूज के मामले पीसीआई और एनबीए द्वारा तय किए जाएंगे। यह दोनों एजेंसियां भारत सरकार द्वारा रेग्यूलेट या ऑपरेट नहीं होती हैं।
पीएम को नहीं थी दिशानिर्देश की जानकारी
सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय के दिशानिर्देश की पीएम को जानकारी नहीं थी। मंगलवार को इस पर विवाद शुरू होने पर उन्होंने जानकारी हासिल की। उन्हें इस दिशानिर्देश का व्यापक विरोध शुरू होने की भी जानकारी दी गई। इसके बाद पीएमओ ने इसे वापस लेने के आदेश जारी किए।
नया विवाद मोल नहीं लेना चाहती सरकार
पहले ही एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों में बदलाव मामले में दलितों के उग्र आंदोलन का सामना कर रही सरकार नया विवाद मोल नहीं लेना चाहती थी। पार्टी के एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक, इस दिशानिर्देश को लोकतंत्र और मीडिया पर हमले के रूप में प्रचारित करने का सिलसिला शुरू हो गया था।