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Fake News मामले पर PM ने बदला स्मृति ईरानी का फैसला, प्रेस काउंसिल का निर्णय होगा आखिरी

Tue, 03 Apr 2018 07:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फेक न्यूज पर पत्रकारों की मान्यता रद्द करने संबंधी दिशानिर्देश पर सूचना प्रसारण मंत्रालय को किरकिरी झेलनी पड़ी है। सोमवार देर रात जारी दिशानिर्देश को पीएम नरेंद्र मोदी ने महज 16 घंटे बाद ही पलट दिया।

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उन्होंने न सिर्फ इन्हें वापस लेने के निर्देश दिए, बल्कि यह भी कहा कि ऐसे मामलों पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) और न्यूज ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन (बीसीए) जैसी संस्थाओं को ही फैसला लेना चाहिए। इसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इन दिशानिर्देशों को वापस ले लिया। एक बयान जारी कर इसकी सूचना दी गई।

इससे पहले, दिशानिर्देश को लेकर विपक्ष के साथ-साथ मीडिया से जुड़ी यूनियनों, वरिष्ठ पत्रकारों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। सोमवार रात करीब नौ बजे मंत्रालय ने फेक न्यूज से संबंधित नए दिशानिर्देश जारी किए थे। पहली बार फेक न्यूज देने के दोषी पाए जाने वाले पत्रकार की छह महीने के लिए मान्यता निलंबित करने, दूसरी बार दोषी पाए जाने पर एक साल के लिए और तीसरी बार दोषी पाए जाने पर हमेशा के लिए मान्यता रद्द करने का प्रावधान किया गया था।

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अहमद पटेल ने उठाए सवाल 
कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, मैं फेक न्यूज पर अंकुश के प्रयास की सराहना करता हूं। क्या गारंटी है कि इसका इस्तेमाल ईमानदार पत्रकारों को प्रताड़ित करने के लिए नहीं किया जाएगा। यह कौन तय करेगा कि क्या फेक न्यूज है?
 
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स्मृति ईरानी ने किया बचाव

इसके जवाब में सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने दिशानिर्देश को उचित ठहराया था। उन्होंने कहा था कि फेक न्यूज के मामले पीसीआई और एनबीए द्वारा तय किए जाएंगे। यह दोनों एजेंसियां भारत सरकार द्वारा रेग्यूलेट या ऑपरेट नहीं होती हैं।

पीएम को नहीं थी दिशानिर्देश की जानकारी 
सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय के दिशानिर्देश की पीएम को जानकारी नहीं थी। मंगलवार को इस पर विवाद शुरू होने पर उन्होंने जानकारी हासिल की। उन्हें इस दिशानिर्देश का व्यापक विरोध शुरू होने की भी जानकारी दी गई। इसके बाद पीएमओ ने इसे वापस लेने के आदेश जारी किए।

नया विवाद मोल नहीं लेना चाहती सरकार
पहले ही एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों में बदलाव मामले में दलितों के उग्र आंदोलन का सामना कर रही सरकार नया विवाद मोल नहीं लेना चाहती थी। पार्टी के एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक, इस दिशानिर्देश को लोकतंत्र और मीडिया पर हमले के रूप में प्रचारित करने का सिलसिला शुरू हो गया था।

 
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