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केरल हाई कोर्ट: मॉल को पार्किंग शुल्क लेने का अधिकार नहीं, जानिए पूरा मामला 

Fri, 14 Jan 2022 07:59 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि

सार

हालांकि अदालत ने मॉल ने शुल्क लेने से रोकने के लिए नहीं कहा, लेकिन कहा कि यह उसके जोखिम पर होगा।
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केरल हाईकोर्ट - फोटो : social media
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विस्तार
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केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि किसी मॉल को पार्किंग शुल्क लेने का अधिकार नहीं है और कलामास्सेरी नगरपालिका से पूछा कि क्या उसने एर्नाकुलम में लुलु इंटरनेशनल शॉपिंग मॉल को इसके लिए कोई लाइसेंस जारी किया था। न्यायमूर्ति पी वी कुन्हीकृष्णन ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मॉल अवैध रूप से ग्राहकों से पार्किंग शुल्क ले रहा था, हालांकि अदालत ने मॉल ने शुल्क लेने से रोकने के लिए नहीं कहा, लेकिन कहा कि यह उसके जोखिम पर होगा।

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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भवन नियमों के अनुसार, भवन निर्माण के लिए पार्किंग की जगह के लिए पर्याप्त जगह आवश्यक है। पार्किंग की जगह इमारत का हिस्सा होती है। बिल्डिंग परमिट इस शर्त पर जारी किया जाता है कि वहां पार्किंग की जगह होगी। इस शर्त के आधार पर इमारत का निर्माण किया जाता है। सवाल यह है कि इमारत के निर्माण के बाद क्या भवन का मालिक पार्किंग शुल्क ले सकता है। प्रथम दृष्टया मेरी राय है कि यह संभव नहीं है। 

अदालत ने नगर पालिका से इस मुद्दे के संबंध में अपने रुख के बारे में एक बयान दर्ज करने के लिए कहा है और मामले की आगे की सुनवाई के लिए 28 जनवरी की तारीख तय की है। इस रिट याचिका पर आखिरी फैसला प्रतिवादी (लुलु मॉल) द्वारा पार्किंग शुल्क संग्रहण के संदर्भ में बिल्डिंग परमिट पर निर्भर करेगा। लेकिन मैं यह स्पष्ट करता हूं कि वे अपने जोखिम पर पार्किंग शुल्क जमा कर सकते हैं। 
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याचिकाकर्ता फिल्म निर्देशक पॉली वडक्कन ने तर्क दिया कि मॉल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वह ग्राहकों को मुफ्त पार्किंग उपलब्ध कराए। 2 दिसंबर को वडक्कन से मॉल में पार्किंग शुल्क के नाम पर 20 रुपये लिए गए थे जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया। 

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