चने के बाद अरहर देश की सबसे दलहन फसल
अभी देश में खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें बोई गई हैं, इसमें धान और अरहर प्रमुख हैं। धान की खेती के लिए जहां अच्छी बरसात वरदान साबित हो रही है, वही दलहन की फसलों के लिए ज्यादा पानी नुकसानदायक साबित हो सकता है। अरहर चना के बाद देश की सबसे बड़ी दालों की फसल है। वार्षिक दाल उत्पादन इसका 13-14 प्रतिशत है। इस वर्ष अरहर की बुआई समाप्त हो चुकी है। इसे लगभग 4.57 मिलियन हेक्टेयर में उगाया गया है, जो पिछले पांच वर्षों की औसत क्षेत्रफल से अधिक है।
ज्यादा बारिश के फसल की पैदावार हो सकती है कम
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि, ज्यादा बारिश के कारण अरहर की जड़ों में ज्यादा पानी एकत्र होने की सूरत में पैदावार प्रभावित हो सकती है। ज्यादा पानी फसल में इकट्ठा होने पर उकठा नामक रोग हो सकता है, जिससे अरहर की फसल की पैदावार कम हो सकती है।अरहर एक दीर्घकालिक फसल है। इसके किस्मों को पकने में 5 से 11 महीने लगते हैं। इसलिए अभी पूर्वानुमान लगाना बहुत जल्दबाजी होगी। लेकिन ज्यादा बुआई के वजह से उम्मीद की जा रही है कि इस वर्ष की फसल मजबूत हो सकती है।
फसल खराब होने से किसानों को नुकसान, बढ़ जाएंगे दाम
दालों के कारोबारियों का कहना है कि, मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि सितंबर में अधिक बारिश मौजूदा फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। कई राज्यों में तेज बारिश हो रही है। इससे अधिकांश फसलें बर्बाद हो चुकी है। जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। अगर अरहर की फसल बर्बाद होती है तो दालों के दामों में इजाफा देखा जा सकता है।
वहीं दूसरी तरफ यदि अरहर की फसल अच्छी रहती है और बाजार में आयात बढ़ जाएगा। इससे दालों के दाम में गिरावट भी आ सकती है। ये आम आदमी के लिए जो राहत होगी लेकिन किसानों को इससे परेशानी हो सकती है। व्यापारियों का अनुमान है कि इस वर्ष दालों की कीमतें ज्यादा नहीं बढ़ेगी, क्योंकि वैश्विक स्तर पर तुअर, उड़द, और दाल की अच्छी पैदावार हो रही है।