राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारत की जनगणना के इतिहास में पहली बार शुरू हुई स्व-गणना प्रक्रिया में हिस्सा लिया। यह प्रक्रिया राष्ट्रीय राजधानी और सात अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हुई है। इसमें लोगों को एक विशेष वेब पोर्टल के जरिये अपनी जानकारी खुद भरने का विकल्प दिया गया है।
देश की प्रथम नागरिक ने राष्ट्रपति भवन में गृह सचिव गोविंद मोहन, भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण और उप महानिदेशक (जनगणना योजना) बिस्वजीत दास की मौजूदगी में पोर्टल पर अपनी पूरी जानकारी भरी।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अधिकारियों की मौजूदगी में अपनी स्व-गणना की जानकारी भरी। मोदी ने कहा, मैंने अपनी स्व-गणना पूरी कर ली है। आज जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत हो रही है, जो मकान सूचीकरण और आवास से जुड़ी प्रक्रिया है। यह पहली बार है, जब जनगणना के आंकड़े पूरी तरह डिजिटल तरीके से जुटाए जा रहे हैं। यह लोगों को अपने घर की जानकारी खुद भरने का अधिकार भी देता है। मैं देश के लोगों से अपील करता हूं कि वे खुद अपनी जानकारी भरें और इस प्रक्रिया में हिस्सा लें।
भारत के विकास को तेज करेगी प्रक्रिया: अमित शाह
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और गृह मंत्री अमित शाह ने भी ऑनलाइन स्व-गणना फॉर्म भरा। अमित शाह ने कहा, जनगणना के पहले चरण के तहत शुरू हो रही मकान सूचीकरण प्रक्रिया में मैंने स्व-गणना फॉर्म भरा। यह प्रक्रिया भारत के विकास को तेज करने और सरकारी योजनाओं को हर नागरिक तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी।
जनगणना 2027 की शुरुआत बुधवार को आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुई, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी के एनडीएमसी और दिल्ली कैंट क्षेत्र भी शामिल हैं। इसमें 15 दिन की स्व-गणना की अवधि दी गई है, जो इस प्रक्रिया में पहली बार हो रहा है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, सिक्किम, ओडिशा, लक्षद्वीप, मिजोरम और दिल्ली के एनडीएमसी व कैंटोनमेंट क्षेत्रों के लिए एक विशेष पोर्टल शुरू किया गया है, जहां लोग सवालों के जवाब देकर एक विशेष पहचान संख्या प्राप्त कर सकते हैं।
दिल्ली में दो चरणों में स्व-गणना प्रक्रिया
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 16 अप्रैल से घर-घर जाकर जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसे मकान सूचीकरण और आवास जनगणना कहा जाता है। दिल्ली में स्व-गणना दो चरणों में होगी। एनडीएमसी और दिल्ली कैंट क्षेत्र में यह 1 से 15 अप्रैल तक चलेगी, जबकि एमसीडी क्षेत्र में 1 से 15 मई तक होगी। इसके बाद घर-घर जाकर जानकारी जुटाने का काम एनडीएमसी और दिल्ली कैंट में 16 अप्रैल से 15 मई तक और एमसीडी क्षेत्र में 16 मई से 15 जून तक चलेगा।
16 भाषाओं में उपलब्ध होगा पोर्टल और मोबाइल ऐप
जो लोग स्व-गणना करेंगे, उन्हें घर पर आने वाले कर्मचारी को अपनी पहचान संख्या दिखानी होगी, जिसके बाद उनकी जानकारी की जांच कर उसे अंतिम रूप से दर्ज किया जाएगा। लोग मोबाइल नंबर से पोर्टल पर लॉग इन कर सकते हैं, नक्शे पर अपनी जगह चुन सकते हैं, घर की जानकारी भर सकते हैं और जमा करने के बाद उन्हें एक पहचान संख्या मिल जाएगी। यह पोर्टल और मोबाइल ऐप हिंदी और अंग्रेजी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध होगा।
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इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों-राज्यपालों ने भी पूरी की ऑनलाइन स्व-गणना प्रक्रिया
इस बीच, ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने भी ऑनलाइन स्व-गणना पूरी की और लोगों से भी ऐसा करने की अपील की। उन्होंने कहा, जनगणना 2027 की शुरुआत पर मैं ओडिशा के लोगों को शुभकामनाएं देता हूं। राज्य के प्रथम नागरिक के रूप में मैंने अपनी जिम्मेदारी निभाई है और आप सभी से भी यही करने की अपील करता हूं।
सिक्किम में राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने भी इस प्रक्रिया की शुरुआत की। मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने भी आइजोल में पोर्टल पर अपनी जानकारी भरकर प्रक्रिया की शुरुआत की। कर्नाटक सरकार ने भी लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान शुरू किया है, ताकि वे ऑनलाइन अपनी जानकारी दें और घर-घर आने वाले कर्मचारियों के साथ सहयोग करें।
घर पर जाकर 33 सवाल पूछेंगे कर्मचारी
जनगणना 2027 आजादी के बाद 16वीं जनगणना है, जो दो चरणों में होगी। पहला चरण मकान सूचीकरण और आवास जनगणना का है, जबकि दूसरा चरण जनसंख्या गणना का होगा। 16 अप्रैल से शुरू होने वाली मकान सूचीकरण प्रक्रिया में देशभर के सभी मकानों और परिवारों की जानकारी दर्ज की जाएगी, जिससे जनसंख्या गणना के लिए आधार तैयार होगा। पहली बार यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी, जिसमें कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिये जानकारी जुटाएंगे।
इस दौरान कर्मचारी हर घर पर जाकर 33 सवाल पूछेंगे, जिनमें घर की सुविधाएं, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और मकान के मालिकाना हक जैसी जानकारी शामिल होगी। केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जिसमें पहली बार जाति गणना भी शामिल होगी। यह जनगणना पहले 2021 में होनी थी। लेकिन देश में कोविड-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था।