शेरियर का कहना है कि भारत में पिछले 40 साल से गर्भपात कानूनी होने के बाद भी हर साल 4600 महिलाएं असुरक्षित गर्भपात से मौत के मुंह में चली जाती हैं। कई देशों में जहां गर्भपात कानूनी है, वहां असुरक्षित गर्भपात से मरने वालों की संख्या में बहुत कमी आई है। उन्होंने बताया कि भारत में सुरक्षित गर्भपात को लेकर सही ट्रेनिंग और जानकारी न होने से यह संख्या बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि देश में हर साल 36 लाख असुरक्षित गर्भपात होते हैं। देश के सबसे बड़े राज्य अकेले मध्य प्रदेश में ही 3 फीसदी ही प्राइमरी हेल्थ सेंटर और 19 फीसदी कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर हैं, जो सुरक्षित गर्भपात की सुविधा मुहैया कराते हैं।
जारी एमपीटी एक्ट के मुताबिक अगर गर्भ से किसी महिला की जिंदगी को खतरा या पिर उसे मानसिक या शारिऱिक चोट पहुंच सकती है, उसे गर्भपात कराने का अधिकार है। वहीं अगर गर्भ में अजन्मे बच्चे
को गंभीर बिमारी का खतरा है, जिससे वह शारिरिक या मानसिक विकलांग पैदा हो सकता है, ऐसे में एक्ट गर्भपात की अनुमति देता है।
अगर बलात्कार से महिला गर्भवती होती है, तो उसे एएक्ट के तहत गर्भपात कराने का अधिकार है। वहीं अगर कोई शादीशुदा महिला या पुरुष गर्भनिरोधकों साधनों के फेल होने से गर्भ ठहरता है, तो उसे एक्ट के तहत गर्भपात कराने का अधिकार है।