फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

असुरक्षित गर्भपात पर लगे रोक, महिलाओं को मिलें ज्यादा अधिकार

Wed, 25 Jul 2018 03:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन

राष्ट्रीय स्वास्थ्य और परिवार सर्वेक्षण के हालिया जारी आंकड़ों के मुताबिक 2015-16 में देश में 53 फीसदी गर्भपात चिकित्सकों और 47 फीसदी गर्भपात नर्स, दाई या परिवार के सदस्यों द्वारा किया जाता है। इसमें एक तिहाई यानी 27.4 फीसदी गर्भपात घर पर कराए गए, जिससे 19 फीसदी महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। वहीं एक संस्था ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रिगनेंसी एक्ट में बदलाव की मांग करते हुए असुरक्षित गर्भपात पर रोक लगाने की मांग की है। 

विज्ञापन


मंगलवार को स्वास्थ्य मुद्दों पर काम करने वाली ग्लोबल हेल्थ स्ट्रैटेजीज ने एक कॉन्फ्रेंस के जरिए मांग की कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रिगनेंसी एक्ट (एमटीपी) 1971 में बदलाव की जरूरत है। फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनिकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया के पूर्व महासचिव डॉ. नोजर शेरियर का कहना है कि कानूनी होने के बावजूद गर्भपात को हमारे देश में अभी भी अवधारणा है कि यह गैर-कानूनी है। 

उन्होंने बताया कि एमटीपी एक्ट के तहत एक महिला अपनी मर्जी से गर्भपात नहीं करवा सकती। अगर 12 हफ्ते से ज्यादा का गर्भ हो तो रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिश्नर की अनुशंसा की जरूरी होती है, वहीं अगर यह 12 से 20 हफ्ते का है, तो 2 रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिश्नर्स की अनुशंसा की जरूरत पड़ेगी। जिसके चलते महिलाएं असुरक्षित गर्भपात का रुख करती हैं।
विज्ञापन


ग्लोबल हेल्थ स्ट्रैटेजीज ने मांग की है कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रिगनेंसी एक्ट (एमटीपी) 1971 में संशोधनों के जरिए 12 हफ्ते तक के गर्भ को गिराने की अनुमति दी जाई। वहीं रेप पीड़िता या असामान्य भ्रूण की स्थिति में गर्भधारण को 20 हफ्तों से बढ़ाकर 24 हफ्ते किया जाए। साथ ही आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी प्रैक्टिशनरों और दाई नर्सों का कानूनी चिक्तिसा गर्भपात का दायरा बढ़ाया जाए। साथ ही 2 रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स की जगह एक की अनुशंसा को ही मान्यता दी जाई।  

विज्ञापन

4600 महिलाएं असुरक्षित गर्भपात से मौत के मुंह में चली जाती हैं।

शेरियर का कहना है कि भारत में पिछले 40 साल से गर्भपात कानूनी होने के बाद भी हर साल 4600 महिलाएं असुरक्षित गर्भपात से मौत के मुंह में चली जाती हैं। कई देशों में जहां गर्भपात कानूनी है, वहां असुरक्षित गर्भपात से मरने वालों की संख्या में बहुत कमी आई है। उन्होंने बताया कि भारत में सुरक्षित गर्भपात को लेकर सही ट्रेनिंग और जानकारी न होने से यह संख्या बढ़ रही है। 

उन्होंने बताया कि देश में हर साल 36 लाख असुरक्षित गर्भपात होते हैं। देश के सबसे बड़े राज्य अकेले मध्य प्रदेश में ही 3 फीसदी ही प्राइमरी हेल्थ सेंटर और 19 फीसदी कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर हैं, जो सुरक्षित गर्भपात की सुविधा मुहैया कराते हैं। 

जारी एमपीटी एक्ट के मुताबिक अगर गर्भ से किसी महिला की जिंदगी को खतरा या पिर उसे मानसिक या शारिऱिक चोट पहुंच सकती है, उसे गर्भपात कराने का अधिकार है। वहीं अगर गर्भ में अजन्मे बच्चे
को गंभीर बिमारी का खतरा है, जिससे वह शारिरिक या मानसिक विकलांग पैदा हो सकता है, ऐसे में एक्ट गर्भपात की अनुमति देता है।

अगर बलात्कार से महिला गर्भवती होती है, तो उसे एएक्ट के तहत गर्भपात कराने का अधिकार है। वहीं अगर कोई शादीशुदा महिला या पुरुष गर्भनिरोधकों साधनों के फेल होने से गर्भ ठहरता है, तो उसे एक्ट के तहत गर्भपात कराने का अधिकार है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें