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तड़पती गर्भवती को छोड़ भाजपाइयों की सेवा में लगे रहे

Mon, 05 Jun 2017 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
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जिला महिला अस्पताल मुख्य भवन के बाहर तड़पती गर्भवती। - फोटो : amarujala
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हरदोई। जिला महिला अस्पताल से गर्भवती को बाहर निकाल दिया गया। वह 43 डिग्री तापमान में अस्पाताल के मुख्य भवन के गेट पर तड़पती रही। प्रभारी सीएमएस भवन की चौथी मंजिल पर चल रहे मुख्यमंत्री के जन्मदिन के उपलक्ष्य में लगे रक्तदान शिविर में भाजपाइयों की आवभगत करते रहे। 40 मिनट गर्भवती गेट पर पड़ी रही, न भाजपाइयों ने ध्यान दिया और न ही सीएमएस व स्टाफ ने। मीडियाकर्मियों से जानकारी मिलने पर डीएम शुभ्रा सक्सेना ने सीएमएस को फटकार लगाई। तब वह चौथी मंजिल से नीचे उतरे और महिला को भर्ती करवाकर ऑपरेशन से प्रसव कराया।
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अहिरोरी ब्लॉक के नेवादा गांव निवासी अनिल की पत्नी विचकुन्ना (30) गर्भवती थी। सोमवार सुबह करीब दस बजे प्रसव पीड़ा होने पर परिजन और आशा कार्यकर्ता एंबुलेंस से विचकुन्ना को लेकर महिला जिला अस्पताल पहुंचे। आशा गर्भवती को लेबर रूम में ले गई। ड्यूटी पर तैनात डॉ. अंजू गुप्ता ने सीजर बताया और लखनऊ ले जाने की बात कहकर गर्भवती को लेबर रूम से बाहर कर दिया। लू के थपेड़ों के बीच परिजनों ने गर्भवती को अस्पताल भवन के गेट पर लिटा दिया। अनिल के पास पत्नी को लखनऊ ले जाने के लिए पैसा नहीं था।

इस पर वह प्रभारी सीएमएस डॉ. वीके गुप्ता को ढूंढता हुआ उनके चेंबर में पहुंचा। प्रभारी सीएमएस अपने चेंबर में नहीं थे। वह चौथी मंजिल पर मुख्यमंत्री के जन्मदिन के उपलक्ष्य में चल रहे रक्तदान शिविर में भाजपा नेताओं की आवभगत में लगे थे। आशा ने नर्सिंग होम ले चलने की सलाह दी। इस बीच 43 डिग्री सेल्सियस तापमान में करीब 40 मिनट तक खुले में पड़ी गर्भवती तड़पती रही।
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उसके होंठ सूख रहे थे, पति अनिल उसके मुंह पर लगातार पानी डाल रहा था। अस्पताल गेट पर तड़प रही गर्भवती विचकुन्ना के पास से सांसद अंशुल वर्मा, राजा बक्स सिंह, भाजयुमो जिलाध्यक्ष संदीप सिंह, पारुल दीक्षित सहित सौ से अधिक नेता निकल गए लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। मीडियाकर्मियों का ध्यान जाते ही खलबली मच गई। कुछ ही देर में मामला डीएम शुभ्रा सक्सेना तक पहुंच गया। डीएम ने फोेन पर प्रभारी सीएमएस के पास जमकर फटकारा तब वह नीचे उतरे और गर्भवती को भर्ती कराया। ऑपरेशन से उसका प्रसव कराया गया।

जिले का स्वास्थ्य महकमा बहुत ही संवेदनहीन हो गया है। चाहे  कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी की तबीयत बिगड़ने का मामला हो या अन्य हर जगह डॉक्टर लापरवाही बरत रहे हैं। प्रभारी सीएमएस को अपने यहां  केस पर नजर रखनी चाहिए थी। मुझे लगता है कि मेरे अस्पताल से निकलते समय महिला गेट पर नहीं थी, फिर भी हो सकता है मुझसे चूक हो गई हो। कार्यकर्ताओं को मरीजों, गरीबों और लाचारों का पहले ध्यान  रखना चाहिए। ईश्वर की कृपा है कि महिला और उसका बच्चा स्वस्थ है। प्रभारी सीएमएस की लापरवाही की शिकायत डीएम से मैं खुद करूंगा।
- श्रीकृष्ण शास्त्री भाजपा जिलाध्यक्ष

मीडियाकर्मियों से जानकारी मिलने पर मैं सीएमओ को लेकर लेबररूम गया था और महिला को भर्ती करने के लिए कहा था। सीएमओ ने महिला को भर्ती कराने का आश्वासन भी दिया था, इसके बावजूद अगर महिला को भर्ती नहीं किया गया तो गंभीर मामला है। मैं इसकी शिकायत डीएम से करके प्रभारी सीएमएस और जिम्मेदार स्टाफ पर कार्रवाई करवाऊंगा। - अंशुल वर्मा सांसद


अस्पताल की डॉक्टर कामचोर हैं। मैं प्रभार लेकर फंस गया हूं। दो डॉक्टर अवकाश पर थीं, जिसकी जानकारी मुझे नहीं थी। मैं मुख्यमंत्री के जन्मदिन के उपलक्ष्य में लगाए गए रक्तदान कैंप में था। जानकारी मिलते ही गर्भवती को भर्ती कराकर प्रसव कराया गया। -डॉ. पीके गुुप्ता प्रभारी सीएमएस
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