मेडिकल कोर्स में दाखिला के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) के खिलाफ अध्यादेश लाने को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा दबाव है। सरकार इस मामले में जल्द ही सर्वदलीय बैठक बुला सकती है। कुछ सांसदों ने परीक्षा के नए फारमेट को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की सलाह दी है।
उनकी दलील है कि अचानक ऐसा करना छात्रों के हितों के खिलाफ है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार की ओर से कुछ पहल की जाए और सरकार अदालत को छात्रों की समस्याओं से अवगत कराये। संसद में भी केरल और महाराष्ट्र के सांसदों ने सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की थी। लेकिन अब पार्टी लाइन से उपर उठकर सांसद संयुक्त परीक्षा पर सवाल उठा रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार पर दबाव बढ़ गया है और वह मामले पर सर्वदलीय बैठक बुलाने पर विचार कर रही है।
क्षेत्रीय भाषाओं में छात्रों की तैयारी का हवाला देते हुए दक्षिण और पूर्व के राज्यों से ताल्लुक रखने वाले सांसदों की दलील है कि नए फार्मेट के तहत परीक्षा अगले साल से आयोजित की जाए। जबकि मामले पर सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया हुआ है कि सभी राज्यों में मेडिकल कोर्स में प्रवेश नीट परीक्षा के तहत होगा। नीट-1 की परीक्षा एक मई को हो चुकी है। दूसरी परीक्षा 24 जुलाई को होनी है।