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एनईईटी परीक्षा के खिलाफ अध्यादेश लाने का सरकार पर दबाव

Fri, 13 May 2016 01:23 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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रिपोर्ट - फोटो : getty images
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मेडिकल कोर्स में दाखिला के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) के खिलाफ अध्यादेश लाने को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा दबाव है। सरकार इस मामले में जल्द ही सर्वदलीय बैठक बुला सकती है।  कुछ सांसदों ने परीक्षा के नए फारमेट को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की सलाह दी है।
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उनकी दलील है कि अचानक ऐसा करना छात्रों के हितों के खिलाफ है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार की ओर से कुछ पहल की जाए और सरकार अदालत को छात्रों की समस्याओं से अवगत कराये। संसद में भी केरल और महाराष्ट्र के सांसदों ने सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की थी। लेकिन अब पार्टी लाइन से उपर उठकर सांसद संयुक्त परीक्षा पर सवाल उठा रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार पर दबाव बढ़ गया है और वह मामले पर सर्वदलीय बैठक बुलाने पर विचार कर रही है।

क्षेत्रीय भाषाओं में छात्रों की तैयारी का हवाला देते हुए दक्षिण और पूर्व के राज्यों से ताल्लुक रखने वाले सांसदों की दलील है कि नए फार्मेट के तहत परीक्षा अगले साल से आयोजित की जाए। जबकि मामले पर सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया हुआ है कि सभी राज्यों में मेडिकल कोर्स में प्रवेश नीट परीक्षा के तहत होगा। नीट-1 की परीक्षा एक मई को हो चुकी है। दूसरी परीक्षा 24 जुलाई को होनी है।
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क्षेत्रीय भाषा में परीक्षा होती है

मेडिकल स्टूडेंटस को ‌मिली सौगात - फोटो : demo pic
परीक्षा के नए फारमेट पर तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश के कारण लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। क्योंकि इन छात्रों ने दो-तीन साल से तैयारी की थी और अब अचानक उनसे परीक्षा के ठीक पहले नीट देने को कहा जा रहा है।

पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में छात्रों ने स्थानीय भाषाओं में परीक्षा की तैयारी की थी लेकिन अब उन्हें अंग्रेजी में परीक्षा देने को कहा जा रहा है। मामले पर समाजवादी पार्टी ने भी कहा है कि क्षेत्रीय भाषा में मेडिकल की पढ़ाई से सभी को फ़ायदा होगा।

वहीं आंध्र प्रदेश के सांसद हनुमंत राव ने नीट परीक्षा का विरोध करते हुए कहा है कि ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों के साथ नाइंसाफ़ी नहीं होनी चाहिए सिर्फ इसलिए की उन्होंने मातृभाषा में पढ़ाई की है। एनसीपी का कहना है कि जेएनयू में तो अभी भी क्षेत्रीय भाषा में परीक्षा होती है, तो मेडिकल में प्रवेश परीक्षा अंग्रेजी में क्यों।
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