लद्दाख में गलवां नाला क्षेत्र और इसके आसपास अपनी तैनाती बढ़ा रही है। स्थायी सैन्य तैनाती की दिशा में चीन के संकेत मिल रहे हैं। इसके सामानांतर भारत ने चुनौती को देखते हुए सैन्य तैनाती बढ़ाई है। रक्षा मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि भारत पड़ोसी देश चीन से तनाव कम करने के सभी उपायों को अजमा रहा है। इसके लिए कूटनीतिक, राजनीतिक दोनों स्तर से प्रयास हो रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय तीनों चीन के अपने समकक्षों के साथ चर्चा कर रहे हैं। सेना के स्तर पर भी संवाद के जरिये समाधान निकालने की कोशिश हो रही है। हालांकि इस पूरे परिप्रेक्ष्य में भारत कहीं भी अपनी कमजोरी जाहिर नहीं करना चाहता। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी उम्मीद है कि जल्द ही कोई समाधान निकल आएगा। भारत और चीन सौहार्दपूर्ण तरीके से आगे बढ़ चलेंगे।
पूर्व एयरचीफ मार्शल पीवी नाइक कहते हैं कि चीन का शीर्ष प्रशासन अब अमेरिका के राष्ट्रपति को बहुत भाव नहीं देता। इसलिए ट्रंप के मध्यस्थता का प्रस्ताव लेकर कूदने से समाधान कम पेचीदगी ज्यादा बढ़ेगी। क्योंकि चीन हमारा पड़ोसी देश है। एयरचीफ मार्शल नाइक कहते हैं कि इसका समाधान सैन्य तैयारी को उत्कृष्ट बनाने के साथ-साथ आपसी स्तर पर ही ज्यादा बेहतर संभव है। राष्ट्रपति ट्रंप चीन को चिढ़ा रहे हैं, अमेरिका चीन को परेशान करने के अवसर तलाश रहा है और भारत को इसका मोहरा बनने से बचना चाहिए।
विदेश मामलों के जानकार स्वर्ण सिंह कहते हैं कि ट्रंप के मध्यस्थता के बाद चीन का रुख कुछ जरूर नरम हुआ है। चीन प्रवक्ता ने अमेरिका के मध्यस्थता के प्रस्ताव को बुरी तरह से खारिज किया है, लेकिन इसके साथ उसे भारत और अमेरिका के मधुर रिश्ते का अंदाजा हो गया है। इसलिए इसका कुछ असर पड़ेगा। मेजर जनरल लखविंदर सिंह कहते हैं कि भारत को चीन की सीमा पर अपने सड़कों के जाल, संसाधन बढ़ाने का प्रयास जारी रखना चाहिए। इसके साथ-साथ संवाद का स्तर भी मजबूत बना रहना चाहिए।
चीन मामले पर गहरी पकड़ रखने वाले स्वर्ण सिंह कहते हैं कि चीन की लद्दाख में घुसपैठ का तरीका संजीदा नहीं कहा जाएगा। यह टैक्टिकल मूव दिखाई देता है। चीन का दोकलाम में आना, 70 से अधिक दिनों तक भारतीय सेना के साथ जूझना, स्थायी सैन्य संरचना का विकास करना कुछ कह रहा है। स्वर्ण सिंह कहते हैं कि चीनी घुसपैठ भी बढ़ी है। पिछले साल 600 बार से अधिक थी। पहले शांतिपूर्ण घुसपैठ होती थी। शिकवा- शिकायत पर चले जाते थे। अब पत्थर, लाठी, डंडों का इस्तेमाल हो रहा है। यही चिंता का विषय है। साफ है कि वह जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं। इसके साथ-साथ चीन अब नेपाल को भी उकसा रहा है। इसलिए पेचीदगियां बढ़ रही हैं।