भारत में कोरोना वायरस का पहला पुष्ट मामला 30 जनवरी को सामने आया था, इसके बाद इस महामारी को रोकने के लिए भारत ने कई कदम उठाए। क्वारंटीन सेंटर्स बनाए गए। अपनी टेस्टिंग क्षमता बढ़ाई। स्वास्थ्य सुविधाओं की ओर तेजी से ध्यान दिया गया, लेकिन बावजूद इसके देशवासी कोरोना के शिकार बनते रहे। अब हालात बिगड़ चुके हैं। कोविड-19 का यह वायरस भले ही चीन से निकला हो, लेकिन अब पूरे एशिया में सर्वाधिक मामले भारत से हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत अब आठवें नंबर पर मौजूद जर्मनी को भी पछाड़ सकता है।
पहला चरण (21 दिन) लगभग 10 हजार संक्रमित मिले
24 मार्च यानी जिस दिन लॉकडाउन का पहला दिन था, उस दिन भारत में 519 लोग कोरोना पॉजिटिव थे। वही 14 अप्रैल तक मरीजों की संख्या बढ़कर 10,815 पहुंच गई। यानी 24 मार्च से 14 अप्रैल के बीच पहले लॉकडाउन के 21 दिन के भीतर 10 हजार के आसपास संक्रमित मिले। औसतन रोजाना 470 कोरोना के नए मरीज पाए जाते थे।
दूसरा चरण (19 दिन) लगभग 29 हजार संक्रमित मिले
दूसरे चरण के शुरुआती आठ दिन में ही मरीज 10 हजार से 20 हजार हो गए। देश में 15 अप्रैल को कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या 11,439 थी, जो 3 मई को बढ़कर 40,263 पहुंच गई यानी लॉकडाउन के दूसरे चरण के दिन के भीतर रोजाना कोरोना के 1500 से ज्यादा नए मामले सामने आते रहे।
तीसरा चरण (14 दिन) लगभग 54 हजार नए मरीज
लॉकडाउन 3.0 चार मई से 17 मई तक चला। 4 मई को देश में कोरोना के 42,553 मामले थे, जो 17 मई को 90,927 हो गए। 18 मई को स्वास्थ्य मंत्रालय ने रिपोर्ट जारी कर 522 नए मरीजों की पुष्टि की थी, साथ ही यह भी बताया था कि यह 24 घंटे में अबतक का सबसे बड़ा आंकड़ा भी था, जिसके साथ लॉकडाउन 3.0 खत्म होते-होते कोरोना पॉजिटिव की संख्या मामले 96,169 हो गई यानी तीसरे चरण में लगभग 54 हजार मामले बढ़े। तीसरे लॉकडाउन में औसतन रोजाना 3800 से ज्यादा मामले।
चौथा चरण (14 दिन) लगभग 81 हजार नए केस
चौथे लॉकडाउन में मरीजों की संख्या सर्वाधिक बढ़ी। अगर ट्रेंड्स पर नजर डाले तो हर लॉकडाउन के दौरान संक्रमितों की संख्या में लगभग दोगुनी बढोतरी देखी गई। 19 मई को स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देश में मरीजों की संख्या 1 लाख 1 हजार एक सौ 39 हो चुकी थी तो वही चौथे लॉकडाउन के आखिरी दिन यानी 31 मई की सुबह तक के आंकड़ों के मुताबिक 1 लाख 82 143 तक कोरोना के शिकार हो चुके हैं यानी पिछले 14 दिन में 81 हजार 104 नए केस सामने आए। चौथे लॉकडाउन में रोजाना 5785 से ज्यादा नए मरीज रोजाना मिलते रहे।
दिल्ली में कोरोना वायरस
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पहला लॉकडाउन 14 अप्रैल और दूसरा 3 मई को खत्म हुआ। इन दोनों चरणों की तुलना करने पर पता चलता है देश में कोरोना बीमारी से मरने वालों की दर 3.3 फीसद के आसपास है। लॉकडाउन के पहले चरण में कोरोना महामारी की मृत्यु दर 80 प्रतिशत थी। जबकि दूसरे लॉकडाउन के अंत तक मृत्यु दर गिरकर सात फीसद के आसपास आ गई थी। दोनों चरणों में मरीजों के ठीक होने की दर बढ़कर 27 फीसद हो गई है। किसी एक मरीज को बीमारी से ठीक होने में दो हफ्तों से ज्यादा का समय लगता है। पहले लॉकडाउन के अंत में कुल मरीजों के ठीक होने की दर 28 गुना थी। लॉकडाउन के दूसरे चरण के अंत में कुल मरीजों के ठीक होने की दर आठ गुना रह गई थी। पहले चरण के बाद 38 लोगों की मौत हुई। दूसरे चरण तक 392 लोग मौत के गाल में समा गए। तीसरे चरण तक 3,029 लोग कोरोना से जिंदगी की जंग हार गए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन के चौथे चरण तक देश में 5164 लोगों की मौत हो चुकी है।
लॉकडाउन की शुरुआत 25 मार्च से हुई थी। तब इसे 14 अप्रैल तक यानी 21 दिन के लिए लागू किया गया था। इस दौरान केवल जरूरी वस्तुओं की दुकानें खोलने की अनुमति दी गई थी और बाकी सभी तरह की सार्वजनिक सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध था। लॉकडाउन का दूसरा चरण 15 अप्रैल से तीन मई तक रहा। इन 19 दिन के दौरान रेड जोन के अलावा ग्रीन जोन और ऑरेंज जोन में दुकानों को खुलने की अनुमति दी गई थी। सरकारी दफ्तरों के महीने भर से बंद ताले खुले साथ ही लोगों की उम्मीदें भी जगने लगीं। विकास परियोजनाएं शुरू हुई। चार मई से 17 मई तक यानी 14 दिन के लॉकडाउन के तीसरे चरण में कई राहतें दी गईं। रेड जोन के अतिरिक्त ग्रीन और ऑरेंज जोन में अन्य दुकानों को खुलने की अनुमति दी गई। प्रवासी मजदूरों के लिए ट्रेन और बसों की शुरुआत की गई। अन्य लोगों के लिए स्पेशल ट्रेन चलाई गईं। इसके साथ ही 'वंदे भारत मिशन' और 'ऑपरेशन समुद्रसेतु' के जरिए विभिन्न देशों में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने की शुरुआत की कई। 18 मई से 31 मई तक जारी चौथे चरण में सरकार ने सख्ती में कुछ ढील दी। कई प्राइवेट दफ्तर पूरी तरह खोल दिए गए। रोस्टर के आधार पर सभी दुकानें खुलने लगीं। हवाई सेवाएं बहाल कर दी गई। हालांकि सार्वजनिक स्थानों पर मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का पालन जारी रहा।
दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर लगा जाम
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अब 1 जून से लागू हुए लॉकडाउन के पांचवें चरण को विशेषज्ञ अनलॉक 1.0 का नाम दे रहे हैं। बाजार में रौनक लौटी और अब जिंदगी को गति देने की बारी है। 68 दिन की बंदी के बाद अनलॉक की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। एक जून से ट्रेनें भी चलने लगेंगी। प्रदेश के भीतर ही सही, बसों का भी संचालन शुरू हो जाएगा। अनलॉक-1 के पहले चरण में केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक आठ जून से सभी धार्मिक स्थल, होटल, रेस्टोरेंट और शॉपिंग मॉल खुल सकेंगे। वहीं, दूसरे चरण में स्कूल-कॉलेज समेत सभी शिक्षण संस्थानों को खोलने की तैयारी है। हालांकि इसकी तारीख राज्यों से पहले चरण के फीडबैक के आधार पर जुलाई में तय होगी। इसके बाद तीसरे चरण में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें, मेट्रो रेल, स्वीमिंग पूल, जिम, सामाजिक, सांस्कृतिक, खेल, राजनीतिक गतिविधियां शुरू करने पर फैसला होगा। सरकार के साथ ही लोग भी अब यह मान चुके हैं कि जीवनशैली में बदलाव लाना जरूरी है। ऐसा करके ही हम इस महामारी से न केवल निपट सकेंगे बल्कि जिंदगी को भी रफ्तार दे सकेंगे।