राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्षी दल हरकत में आने लगे हैं। कई विपक्षी दलों ने कांग्रेस को गहरी नींद से जागने की नसीहत दी है। उन्होंने कांग्रेस को एनडीए के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारने की पहल करने को कहा है। दरअसल, विपक्षी दलों का कहना है कि भले ही भाजपा ने यूपी समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में शानदार सफलता पाई हो लेकिन अपनी पसंद का राष्ट्रपति बनाना उसके लिए आसान नहीं है।
सहयोगी दल शिवसेना के भाजपा को आंख दिखाने से विपक्षी खेमा ये उम्मीद जता रहा है कि अगर कांग्रेस किसी मजबूत उम्मीदवार को उतारती है तो शिवसेना भाजपा को गच्चा दे सकती है। संभावना जताई जा रही है कि एनडीए के खिलाफ उम्मीदवार उतारने को लेकर विपक्षी दलों की जल्द ही संयुक्त बैठक हो सकती है।
भाकपा के वरिष्ठ नेता डी राजा कहते हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष को एकजुट होकर उतरना चाहिए। इसके लिए कांग्रेस को सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर पहल करनी चाहिए। वहीं एनसीपी नेता डी पी त्रिपाठी ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि कांग्रेस सीख नहीं रही है। जदयू के महासचिव के सी त्यागी कहते है कि उनकी पार्टी पहले दिन से कह रही है कि कांग्रेस को जल्द से जल्द इस मुद्दे पर आम सहमति बनानी चाहिए।
अब बिल्कुल समय नहीं रह गया है। कांग्रेस को तुरंत पहल करनी चाहिए। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस एनडीए के उम्मीदवार का नाम जानने के बाद अपने पत्ते खोलना चाहती है। मगर विपक्षी दल कह रहे हैं कि पार्टी को इस मुद्दे पर बात कर किसी बड़े धर्म निरपेक्ष चेहरे पर सर्वसम्मति बनानी चाहिए। विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि भाजपा को अभी 16 हजार वोट और चाहिए।
शिवसेना के बगावती तेवरों को देखते हुए उसके लिए रायसीना हिल्स का रास्ता इतना आसान नहीं लग रहा। भाजपा एक-एक वोट का ख्याल रख रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर से इस्तीफा नहीं दिलवाने से भाजपा ने करीब 2100 वोटों की कमी पूरी की है। 13 अप्रैल को आए उपचुनाव के नतीजों में बाजी मारने से पार्टी को काफी राहत मिली है।