मोदी राज में अब तक बिखरे रहे विपक्ष को शुक्रवार को बड़ी कामयाबी मिली जब 17 विपक्षी पार्टियों के 31 नेता एकसाथ बैठे। बैठक का खास पक्ष यह रहा कि यूपी के दो ध्रुव सपा-बसपा के मुखिया अखिलेश यादव और मायावती पहली बार एकसाथ बैठे।
प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वामपंथी नेता सीताराम येचुरी भी पहली बार साथ थे। जगह थी संसद भवन की लाइब्रेरी और मुद्दा था राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनावों में विपक्ष की रणनीति तय करना। दिन भी ऐसा था, जब मोदी सरकार देश भर में अपने तीन साल का जश्न मना रही थी।
यूपी में कांग्रेस से मिलकर चुनाव लड़े अखिलेश ने नतीजों से पहले मायावती के साथ आने के संकेत दे दिए थे, लेकिन भाजपा की बड़ी जीत ने उन्हें यह मौका ही नहीं दिया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दो महीने से राज्यों में आपसी घमासान करने वाले दलों के नेताओं को साथ लाने की कोशिश कर रही थीं।
शुक्रवार की राजनीतिक दावत में राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति चुनाव के बहाने विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर खुलकर अपनी बात रखी और इस एकता को बनाने रखने का संकल्प भी किया।
गुलाम नबी आजाद ने कहा कि विपक्षी दल सरकार समाज को तोड़ने वाली नीतियों का संसद के अंदर और बाहर मिलकर विरोध करेंगे। विपक्ष ने कश्मीर के हालातों, सहारनपुर की घटना और विमुद्रीकरण पर सरकार पर निशाना साधा।
ममता बनर्जी की फ्लाइट थी, लिहाजा वे सबसे पहले निकलीं। जबकि अखिलेश कुछ देरी से बैठक में पहुंचे। ममता ने बताया कि विपक्ष में आमसहमति बनाने की कोशिश की जाएगी, ऐसा न होने पर एक छोटी कमेटी गठित हो सकती है। उन्होंने सेकुलर चेहरे की बात कही जो सबको स्वीकार हो। बसपा नेता मायावती ने कहा बैठक बहुत अच्छे वातावरण में हुई।
राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति को लेकर संयुक्त विपक्ष ने फैसला किया है कि परंपरा के तहत सत्तापक्ष आमसहमति से संविधान की रक्षा करने वाला सेकुलर उम्मीदवार उतारे। सरकार के ऐसा न करने पर ही विपक्ष मैदान में अपना उम्मीदवार उतारेगी। बैठक में एक सब कमेटी के गठन पर भी चर्चा हुई है जो संभावित नामों पर विचार-विमर्श करेगी।
सम्पूर्ण विपक्ष की ओर से जदयू नेता शरद यादव ने मीडिया को बताया कि हमेशा से परंपरा रही है राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव में सत्तारूढ़ दल आमसहमति बनाने का प्रयास करता हैं। हम आशा कर रहे हैं कि सत्ताधारी दल प्रयास करेगी।
अगर ऐसा नहीं किया तो फिर विपक्ष न सिर्फ अपना उम्मीदवार उतारेगी बल्कि गोलबंद हुई सभी पार्टियां संसद और बाहर राजनीति लड़ाई लड़ने की तैयारी करेंगी। विपक्ष की मांग है कि राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के पद पर संविधान की रक्षा करने वाला व्यक्ति ही बैठे।