राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस की विपक्षी दलों को जोड़ने की कोशिश के बीच यूपी और बिहार से अच्छी खबरें नहीं आ रही हैं। यूपी में समाजवादी पार्टी में दो फाड़ सामने आ गया है। अब मुलायम सिंह यादव को तय करना है कि वे बेटे अखिलेश की पार्टी में संरक्षक की भूमिका में रहेंगे या भाई शिवपाल की नई पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे। पहले से अंक गणित को लेकर कमजोर दिख रहे विपक्ष का गणित इस झगड़े में गड़बड़ा सकता है। उधर, बिहार की खबर भी विपक्षी एकता की मुश्किलें बढ़ा सकती है।
कांग्रेस समाजवादी पार्टी से दो स्तर पर बातचीत कर रही थी। सोनिया गांधी की मुलायम सिंह यादव से और राहुल गांधी की अखिलेश यादव से बातचीत हो रही थी। अखिलेश यादव ने एक बार फिर दोहराया है कि उन्होंने कांग्रेस के साथ लंबी पारी खेलेंगे के लिए हाथ मिलाया है। दूसरी ओर, विधानसभा चुनाव में शिवपाल यादव कांग्रेस से गठबंधन के खिलाफ थे। अब शिवपाल के अलग पार्टी बना लेने से उनके समर्थक विधायक और सांसद भी उनके साथ जा सकते हैं। ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव में उनकी भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है।
उधर, लालू प्रसाद यादव और शहाबुद्दीन के बीच बातचीत के कथित टेप का खुलासा होने के बाद बिहार में गठबंधन की राजनीति का प्रभावित होना लाजमी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के बीच रिश्तों में खटास लंबे समय से है, जो गठबंधन की राजनीति को प्रभावित करती रही है। ऐसे में एक बार फिर इस मामले के तूल पकड़ने के बाद सीधे तौर कटघरे में नीतीश कुमार की सरकार होगी।
राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए जल्द ही लालू प्रसाद यादव की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात होनी है। नीतीश कुमार पहले ही सोनिया से मिलकर अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं। अब लालू और नीतीश कुमार के रिश्तों की तल्खी से कांग्रेस को धक्का लग सकता है। कांग्रेस के नेता इस संबंध में फिलहाल कुछ कहने से बच रहे हैं। एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक समाजवादी पार्टी का झगड़ा पारिवारिक है। ऐसे में उससे विपक्षी एकता में बाधा नहीं आएगी।