राष्ट्रपति चुनाव के एलान के साथ ही विपक्ष ने अब दोहरी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। सबसे पहले विपक्ष अपने घर की एकजुटता को चाक चौबंद करने में फिर से जुट गया है। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने कई दलों के प्रतिनिधियों का उपसमूह गठित किया है। जो विपक्ष के उम्मीदवार का चयन करेगा। साथ ही सभी दलों से इस संबंध में संपर्क में रखेगा।
एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार इस उप समूह के प्रमुख रहेंगे। इस उपसमूह की हर हफ्ते बैठक होगी। अगर एनडीए की ओर से इस मसले पर बातचीत की पहल की जाती है तो यही उप समूह बात करेगा। दूसरा विपक्ष की नजर अब एनडीए के उम्मीदवार के एलान पर टिक गई है। विपक्ष ने रणनीति बनाई है कि एनडीए के उम्मीदवार के एलान के बाद ही वे अपने उम्मीदवार का एलान करेगा।
विपक्ष के नेताओं का कहना है कि वे पहले उम्मीदवार का एलान कर एनडीए को यह कहने का मौका नहीं देना चाहता कि वे राष्ट्रपति चुनाव में सर्वसम्मति बनाना चाहता था। मगर विपक्ष ने पहले ही उम्मीदवार घोषित कर दिया।
जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव कहते है कि एनडीए अगर सर्वसम्मति बनाने की कोशिश नहीं करता तो विपक्ष अपना उम्मीदवार घोषित कर देगा। कांग्रेस, जदयू और राष्ट्रीय जनता दल समेत कई विपक्षी दल चाहते है कि एनडीए के साथ किसी भी उम्मीदवार पर सर्वसम्मति बनाने की बात भी की जाए तो एकजुट होकर की जाए। ताकि सत्तारूढ़ एनडीए पर दबाव बनाया जा सके। विपक्ष अपनी इस कामयाबी को लेकर बहुत खुश है कि उसके मंच पर धुरविरोधी भी एकजुट हो गए हैं।
पिछले महीने 26 मई को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दोपहर भोज पर धुरविरोधी सपा और बसपा के साथ तृणमूल कांग्रेस व माकपा भी एकजुट हो गए थे। विपक्ष ने अपने कुछ उम्मीदवारों का चयन किया है। अभी किसी एक पर सहमति नहीं बनी है।
गोपाल कृष्ण गांधी, मीरा कुमार, शरद यादव जैसे कुछ नाम चर्चा में है। राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर विपक्ष के पाले में कांग्रेस, जदयू, राजद, माकपा, तृणमूल कांग्रेस, सपा, बसपा, डीएमके, नेशनल कांफ्रेंस, जेएमएम, केरल कांग्रेस, भाकपा, आरएसपी, ऑल इंडिया मुस्लिम लीग और जेडीएस समेत कुल 17 पार्टियां शामिल है। इसके अलावा बीजू जनता दल, तेलंगाना राष्ट्र समिति और वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों ने अभी विपक्ष से दूरी बनाई है।