मारने के लिए बाजार से गोवंश की खरीद-फरोख्त पर रोक संबंधी केंद्र सरकार की अधिसूचना को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि 23 मई को सरकार द्वारा जारी यह अधिसूचना असंवैधानिक है, क्योंकि यह खाने के अधिकार और निजता के अधिकार के विपरीत है। यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता ने जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस दीपक गुप्ता की अवकाशकालीन पीठ केसमक्ष इस याचिका का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की गुहार लगाई गई। जिसके बाद पीठ ने 15 जून को याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
याचिका हैदराबाद निवासी मोहम्मद अब्दुल फयूम कुरैशी की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि केरल, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और कर्नाटक ने कहा है कि वह केंद्र की इस अधिसूचना को नहीं अपनाएंगे क्योंकि यह इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की आजीविका पर प्रभाव डालेगा।
याचिका में यह भी कहा गया है कि खाने के उद्देश्य से जानवर को मारना, उनके मांस का भोजन करना या जानवर की कुर्बानी अथवा बलि कुछ समुदाय की सांस्कृतिक पहचान है। इस संस्कृति की रक्षा के लिए संविधान के अनुच्छेद की धारा 29 के तहत संरक्षण प्राप्त है।
खरीद-फरोख्त पर पाबंदी से किसान व मवेशी व्यापारियों के समक्ष आर्थिक संकट हो गया है। उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। याचिका में सरकार की इस अधिसूचना को असंवैधानिक करार देने की गुहार की गई है।
23 मई को जारी केंद्र सरकार की अधिसूचना में मारने के लिए बाजार से गोवंश की खरीद-फरोख्त पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। हालांकि अधिसूचना में साफ किया गया कि कृषि के उद्देश्य से मवेशियों की खरीद-फरोख्त जारी रहेगी। इसके लिए खरीदार को शपथ देना होगा कि वह कृषि कार्यों के लिए ही मवेशियों का इस्तेमाल करेंगे।