चुनाव आयोग ने अभी तक राष्ट्रपति चुनाव के तारीख की घोषणा नहीं की है लेकिन विपक्षी दल अपना उम्मीदवार खड़ा करने में जल्दबाजी दिखा रहे हैं। इससे सर्वसम्मति से राष्ट्रपति का चुनाव करने के सभी विकल्प लगभग खत्म होते दिखाई पड़ रहे हैं।
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इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार भाजपा के एक प्रभावशाली नेता ने कहा कि अगर विपक्ष अपना उम्मीदवार खड़ा करता है तो हमारे पास चुनाव लड़कर जीतना ही एकमात्र विकल्प होगा। लेकिन अगर विपक्ष सर्वसम्मति से राष्ट्रपति चुनने की हमारी भावना का सम्मान करता हैं तो हम इसका स्वागत करेंगे।
विपक्ष की इस जल्दबाजी से भाजपा को बहाना मिल गया है। अब राष्ट्रपति पद के लिए सर्वसम्मति से चुनाव न हो पाने पर भाजपा इसका दोषी विपक्षी दलों को ठहरा सकती है। पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विपक्ष के कई नेताओं से मुलाकात की। इस बैठक में उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हुई। विपक्षी दल सार्वजनिक तौर पर अपना अपना उम्मीदवार उतारने की बात कर रहे हैं।
अभी तक भाजपा की ओर से इस मसले में साफ तौर से कुछ कहा नहीं गया है लेकिन भाजपा के नेताओं का मनना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम से विपक्ष को चौंका भी सकते हैं।
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गौरतलब है कि 2007 में यूपीए ने प्रतिभा पाटिल का नाम राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर आगे किया था। लेकिन भाजपा ने चुनाव का रास्ता अपनाया था। भाजपा के वरिष्ठ नेता भैरोसिंह शेखावत प्रतिभा पाटिल के सामने राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर खड़े थे। इसके अलावा 2012 में भी सोनिया गांधी ने प्रणव मुखर्जी को राष्ट्रपति उम्मीदवार खड़ा करने के बाद विपक्षी दलों से सर्वसम्मति से राष्ट्रपति चुनने की अपील की थी लेकिन ममता और मुलायम ने इसमें साथ नहीं दिया। इसके अलावा पी ए संगमा भाजपा समर्थन से राष्ट्रपति चुनाव में कूद पड़े थे।