राष्ट्रपति द्वारा अपने हाथ से सभी को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार नहीं देने पर उठे विवाद के बावजूद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सार्वजनिक समारोहों को एक घंटे का समय देने के अपने नियम में कोई तब्दीली नहीं करेंगे। इसकी वजह उनका हद से ज्यादा व्यस्त कार्यक्रम बताया जा रहा है। वे खुद को रिबन काटने और पुरस्कार वितरण करने तक सीमित नहीं रखना चाहते हैं।
राष्ट्रपति देश के 140 केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति यानी चांसलर होने के नाते उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। वे नए विश्वविद्यालयों को पुरानी यूनिवर्सिटी के स्तर तक लाने के लिए उन्हें छह-छह के समूहों में बांट कर उनके वीसी के साथ बैठक कर रहे हैं।
इन बैठकों में मानव संसाधन विकास मंत्री व सरकार के कई प्रतिनिधि रहते हैं। वे हर वाइस चांसलर से समस्या समझ कर उसका निदान करते हैं। वे हर समूह के साथ साल में कम से कम दो बार जरूर मिल रहे हैं। जबकि उनके पूर्ववर्ती साल में केवल एक बार सभी 140 वीसी को भोजन पर बुलाते थे।