राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस बात पर जोर दिया है कि देश के सभी हाईकोर्ट को उसी भाषा में फैसले देने चाहिए जो मुद्दई को समझ में आ सके। इसके मद्देनजर उन्होंने फैसलों की प्रमाणित प्रतिलिपियां जारी करने की व्यवस्था कायम करने का भी सुझाव दिया है।
शनिवार को यहां केरल हाईकोर्ट की 75वीं वर्षगांठ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने मुकदमों के त्वरित निपटारे की वकालत करते हुए कहा कि देर से मिले न्याय का सबसे ज्यादा खामियाजा गरीबों और शोषितों को भुगतना पड़ता है।
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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद की मौजूदगी के बीच राष्ट्रपति ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले अंग्रेजी में लिखे जाते हैं, लेकिन इस देश में कई भाषाएं बोली जाती हैं। जरूरी नहीं है कि हर वादी अंग्रेजी जानता हो। ऐसे में वह फैसले की बारीकियों से वाकिफ नहीं हो पाएगा और फैसले को समझने के लिए वह पूरी तरह से वकील या किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर रहेगा। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है।