राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित चार विधेयकों को मंजूरी दे दी है। इसी के साथ देश में आगामी एक जुलाई से ‘एक देश एक कर’ व्यवस्था लागू करने की मंजिल और करीब आ गई।
राष्ट्रपति ने जिन विधेयकों पर अपनी सहमति की मुहर लगाई है उनमें केंद्रीय जीएसटी कानून 2017, एकीकृत जीएसटी कानून 2017, जीएसटी (राज्यों को मुआवजा) विधेयक 2017 और संघ शासित प्रदेश जीएसटी कानून 2017 शामिल हैं। अब राज्य की विधानसभाओं में राज्य जीएसटी विधेयक को पारित किया जाना बाकी है।
राष्ट्रपति ने जिन विधेयकों को मंजूरी दी है, उन्हें संसद के बुधवार को समाप्त हुये बजट सत्र में पारित किया गया था। सरकार ने आगामी एक जुलाई से देश भर में जीएसटी प्रणाली लागू करने का संकल्प व्यक्त किया है। जीएसटी व्यवस्था लागू करने के लिये गठित जीएसटी परिषद ने जीएसटी से जुड़े विभिन्न नियमों को पहले ही मंजूरी दे दी है। परिषद ने जीएसटी की चार दरें पांच, 12, 18 और 28 फीसदी तय की है। अब इन दरों में वस्तुओं एवं सेवाओं को रखने की तैयारी चल रही है।
जीएसटी से जुड़े चार विधेयकों को राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद सभी राज्यों को स्टेट जीएसटी विधेयक अपनी-अपनी विधानसभाओं में पारित कराना होगा इसके बाद ही नया जीएसटी कानून लागू किया जा सकेगा।
जीएसटी लागू होने से महंगाई नहीं बढ़ेगी
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संसद में जीएसटी पर बहस के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्पष्ट किया था कि जीएसटी लागू होने से महंगाई नहीं बढ़ेगी, जैसा कि कुछ वर्गों द्वारा आशंका जताई जा रही है। उन्होंने कहा था कि इससे पूरे देश में एक समान कर व्यवस्था की शुरुआत होगी।
जेटली ने कहा है कि एक बार नई व्यवस्था लागू हो जाए, उसके बाद विभिन्न विभागों द्वारा कारोबारियों को परेशान करने की समस्या अपने आप खत्म हो जाएगी। यही नहीं, पूरे देश में एक समान कर होगा।
आजादी के बाद से भारत का सबसे बड़ा कर सुधार माना जाने वाला जीएसटी कानून के लागू होने से देश की अर्थव्यवस्था में अपने आप दो फीसदी की बढ़ोतरी होने की बात कही जा रही है। यही नहीं, कहा जा रहा है कि जीएसटी के लागू होने से आम आदमी को सस्ता सामान मिलेगा।
वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले अधिकतर करों को जीएसटी के अंतर्गत लाने का प्रस्ताव है। इसके लागू होते ही केंद्र को मिलने वाले केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, सर्विस टैक्स और राज्यों द्वारा वसूले जाने वाले वैट, मनोरंजन कर, लग्जरी टैक्स, लॉटरी टैक्स, इंट्री टैक्स, चुंगी आदि इसमें समाहित हो जाएंगे।