राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का विभिन्न क्षेत्रों में योगदान भावी पीढ़ियों को राष्ट्र निर्माण में काम करने की प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने लोगों से अपने जीवन में आंबडेकर के आदर्शों को अपनाने की अपील की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर देशवासियों को बधाई दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में बाबा साहेब का योगदान युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दे रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि बाबा साहेब ने चुनौतियों का सामना करने के बाद भी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने अपनी असाधारण उपलब्धियों से दुनिया में सम्मान पाया।
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राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि डॉ. भीमराव शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और दलितों के सशक्तीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण साधन मानते थे। विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान से भावी पीढ़ियों को राष्ट्र निर्माण में काम करने की प्रेरणा मिलती रहेगी। इस दौरान राष्ट्रपति ने लोगों से अपील की कि वह अपने जीवन में डॉ. आंबेडकर के आदर्शों को अपनाने और ऐसे राष्ट्र निर्माण के लिए काम करने का संकल्प लें, जो सामाजिक सद्भाव और समानता की भावना को मूर्त रूप दे।
विलक्षण योग्यता और बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी थे बाबा साहेब
राष्ट्रपति ने कहा कि बाबा साहेब विलक्षण योग्यता और बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी थे। वह एक अर्थशास्त्री, शिक्षाविद्, कानूनविद और महान समाज सुधारक थे। वे समतावादी समाज के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने महिलाओं और वंचित वर्गों के आर्थिक और सामाजिक अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया।
14 अप्रैल, 1891 में महाराष्ट्र में हुआ जन्म
डॉ. भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 में महाराष्ट्र के एक दलित परिवार में हुआ था। वह एक साधारण पृष्ठभूमि ताल्लुक रखते थे। वह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हाशिये पर पड़े लोगों की आवाज बने। उन्हें कई सामाजिक सुधारों की शुरुआत भी की।