राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को भारतीय सांख्यिक सेवा (आईएसएस) के प्रशिक्षुओं से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सांख्यिकीय उपकरण और मात्रात्मक तकनीकें प्रभावी शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, क्योंकि ये नीतिगत निर्णयों के लिए ठोस आंकड़ों का आधार प्रदान करती हैं।
'आंकड़े बनते हैं नीति निर्माण का आधार'
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारें स्वास्थ्य, शिक्षा, जनसंख्या, रोजगार आदि के आंकड़े जुटाने वाली राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली पर निर्भर करती हैं। ये आंकड़े नीति तैयार करने के लिए आधार बनते हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्राचीन सभ्यताओं में भी शासक कर संग्रहण के लिए साधारण जनगणना आंकड़ों का उपयोग करते थे।
सांख्यिकी प्रभावी शासन की रीढ़
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, 'शासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व लाने का एक उपकरण सांख्यिकीय विश्लेषण है। सांख्यिकी न केवल प्रभावी शासन की रीढ़ है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक विकास का एक उपकरण भी है। किसी भी नीति को सही तरीके से तैयार करने के लिए आंकड़े एक दम सटीक होने चाहिए। इसलिए यह सांख्यिक सेवा अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे सही आंकड़े एकत्र करें, जो ठोस और उद्देश्यपूर्ण निर्णयों का आधार बन सकें।
उन्होंने कहा, 'सरकार को नीतियों को बनाने, लागू करने और मॉनिटर करने के लिए आंकड़ों की आवश्यकता होती है। नागरिकों को सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की निष्पक्ष समझ और मूल्यांकन के लिए आंकड़ा चाहिए होता है।'
इस बात पर भी राष्ट्रपति ने दिया जोर
राष्ट्रपति ने आईएसएस अधिकारियों से आग्रह किया कि वे आंकड़े संग्रहण के दौरान आम लोगों, खासकर गरीब और वंचित वर्गों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील रहें। उन्होंने कहा, 'आप जो भी आंकड़े इकट्ठा करेंगे उसे लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए उपयोग किया जाएगा।'
उदाहरण देते हुए, उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में इकट्ठे किए गए आंकड़े- साक्षरता दर, स्कूल में नामांकन, स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर और बीमारियों की प्रवृत्तियों की निगरानी के लिए आधार बनेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि आईएसएस अधिकारी राष्ट्रीय खाते, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक और अन्य महत्वपूर्ण सूचकांकों को तैयार करने के जिम्मेदार होते हैं, जो अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को मापने में मदद करते हैं। इसके अलावा, वे सामाजिक आंकड़ों पर काम करते हैं, जैसे जनसंख्या, मानव विकास, रोजगार और सामाजिक न्याय के आंकड़े।
'नई तकनीकों का इस्तेमाल भी जरूरी'
उन्होंने इस पर भी जोर दिया कि आज के समय में नई तकनीकों का इस्तेमाल भी जरूरी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रेडिक्टिव एनालिसिस और मशीन लर्निंग के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि आप इन नई तकनीकों का प्रभावी रूप से उपयोग करें।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि भारतीय सांख्यिक सेवा के अधिकारियों द्वारा किए गए शोध से नीतियों को तैयार किया जा सकता है जो देश की बदलती जरूरतों का जवाब दे सके। कृषि, उद्योग और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक योजना में योगदान देने के लिए सांख्यिकीय मॉडलिंग और पूर्वानुमान तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।