सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन ने नई दिल्ली में एक नेशनल काफ्रेंस का आयोजन किया है। जहां युवा वकीलों को आगे लाने पर चर्चा हो रही है। इस कांफ्रेंस को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद औऱ सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने संबोधित किया। कोविंद ने जहां कहा कि भारतीय न्याय प्रणाली की दुनिया इज्जत करती है वहीं जस्टिस मिश्रा ने युवाओं के लिए पुराने लोगों को जगह बनाने के लिए कहा।
राष्ट्रपति
रामनाथ कोविंद ने कहा, 'भारत की न्यायिक व्यवस्था का रक्षाहीन के लिए न्याय के समर्थक के तौर पर पूरी दुनिया में सम्मान किया जाता है। भारतीय कानूनी प्रणाली लंबी देरी के लिए चिह्नित है। बहुत सी अदालतों में 3.3 करोड़ मामले लंबित पड़े हुए हैं। जिसमें से 2.84 करोड़ मामले निचली अदालतों में, 43 लाख हाईकोर्ट में और लगभग 58 हजार सुप्रीम कोर्ट में हैं। 'इन देरी की कई वजह हैं। जिसमें बुनियादी ढांचे का अंतर और रिक्त पड़े पद हैं, खासतौर से निचली अदालतों में। स्थगन की मांग करना एक अपवाद संस्कृति है। न्यायलयों को इस अभ्यास को रोकना चाहिए। अतीत में ऐसा देखा गया है कि सरकार और सरकारी एजेंसियां खुद मुकदमेबाजी के कई मामलों में वादी थे। मैं इस संख्या को कम करने के लिए ईमानदारी से प्रयास करने की वजह से भारत सरकार की सराहना करता हूं।''
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश
दीपक मिश्रा ने भी कांफ्रेंस संबोधित करते हुए कहा, 'समय आ गया है कि बिना किसी कार्यकाल या अभ्यास के युवा वकील कुशलतापूर्वक अदालत को संबोधित कर रहे हैं। जहां तक कानून का संबंध है, यदि तकनीकी रूप से सक्षम होने के बाद युवा वकीलों को अनुमति नहीं दी जाती है तो पुराने लोगों को उनके लिए जगह छोड़ देनी चाहिए।'