फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्जी धमकियों से फिर दहशत फैलाने की तैयारी?: इस बार सेलिब्रिटी और नेता निशाने पर, खुफिया एजेंसियां सतर्क

Mon, 26 Oct 2026 04:43 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी आईएएनएस, नई दिल्ली

सार

भारतीय खुफिया एजेंसियों ने फर्जी धमकियों के दोबारा बढ़ने की आशंका जताई है। इस बार सेलिब्रिटी और राजनेता निशाने पर हो सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसी धमकियों का मकसद समाज में डर और मानसिक तनाव फैलाना है। आइए जानते हैं कि सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से क्या अपील की?
विज्ञापन
फर्जी धमकियों से कैसे फैलती है दहशत? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय खुफिया एजेंसियां देश में फर्जी धमकियों की बढ़ती संख्या पर कड़ी नजर रख रही हैं। पिछले साल सुर्खियों में रहा यह मुद्दा, सुरक्षा एजेंसियों की ओर से की गई ठोस कार्रवाई के बाद काफी कम हो गया है। पिछले साल, ये धमकियां मुख्य रूप से एयरलाइन उद्योग और स्कूलों को दी गई थीं। इससे एयरलाइनों को भारी नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि कई उड़ानों को उड़ान भरने की मंजूरी मिलने से पहले ही रोकना (ग्राउंड करना) पड़ा था।
विज्ञापन


अधिकारी ने क्या बताया? 
स्कूलों को मिली झूठी धमकियों ने छात्रों, उनके माता-पिता और शिक्षकों को काफी मानसिक नुकसान पहुंचाया है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसे स्पष्ट संकेत हैं कि इस तरह की धमकियां एक बार फिर बढ़ सकती हैं। इस बार, इनका मुख्य निशाना सेलिब्रिटी और राजनेता हो सकते हैं।

अधिकारी ने कहा, 'टाइगर श्रॉफ की शूटिंग वाली घटना के बाद, सेलिब्रिटीज के बीच काफी घबराहट है। आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) को लगता है कि इस माहौल का फायदा उठाने का यह सही समय है। वे फिल्म जगत की हस्तियों को निशाना बनाकर ऐसी झूठी धमकियों की संख्या बढ़ा सकते हैं।'
विज्ञापन


एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इनमें से किसी भी धमकी को सीधे तौर पर खारिज नहीं किया जा सकता। हर धमकी की जांच करनी पड़ती है और पूरी तरह से पुष्टि होने के बाद ही उसे 'झूठी धमकी'  घोषित किया जा सकता है।

इसे मानसिक खेल क्यों बताया?
अधिकारी ने बताया कि यह एक तरह का 'मानसिक खेल' है, जिसका मकसद समाज में दहशत फैलाना है। अधिकारी ने कहा, 'उदाहरण के लिए, जब किसी सेलिब्रिटी को धमकी मिलती है, तो भले ही बाद में पता चले कि वह झूठी थी, लेकिन उस घटना का असर उनके दिमाग पर लंबे समय तक बना रहता है। वे अपनी हर गतिविधि को लेकर सतर्क हो जाते हैं। यही वह मानसिक तनाव है, जिसे ये लोग पैदा करना चाहते हैं।'

हाल ही में अभिनेता अमिताभ बच्चन और गायक दिलजीत दोसांझ को मिली बम की धमकियां इसी बात का संकेत हैं कि ये लोग क्या करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि दोनों ही धमकियां झूठी निकलीं, लेकिन इनसे काफी दहशत फैल गई। सुरक्षा एजेंसियों को इस खतरे को खत्म करने और इसे 'झूठी धमकी' घोषित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

सेलिब्रिटीज या राजनेताओं के अलावा किसे बनाते हैं निशाना?
अधिकारी ने बताया कि ऐसी धमकियां सिर्फ सेलिब्रिटीज या राजनेताओं तक ही सीमित नहीं हैं। इन धमकियों के पीछे के लोग ऐसे खास इलाकों को भी निशाना बना सकते हैं, जहां पहले से ही हिंसा या ऐसी ही घटनाओं की वजह से डर का माहौल है। ऐसी जगहों पर धमकियां देने से लोगों की घबराहट और बढ़ जाती है, जिससे उनके मन में असुरक्षा की भावना बनी रहती है।

अधिकारी ने बताया कि आईएसआई भारत में 'साइकोलॉजिकल ऑपरेशन' (मानसिक युद्ध) चलाने के लिए एक विशेष विंग का इस्तेमाल करती है। ये झूठी धमकियां उसी का हिस्सा हैं। इसके जरिए वे लोगों के मौजूदा डर का फायदा उठाकर अपने हमलों को और तेज करना चाहते हैं।

अधिकारी ने आगे कहा कि इस तरह के ऑपरेशन चलाना काफी आसान और किफायती होता है। आईएसआई के हैंडलर युवाओं और लड़कों को थोड़ी-बहुत रकम देकर अपने काम में लगा लेते हैं। फिर उन्हें यह काम सौंपा जाता है कि वे कागज के टुकड़ों पर धमकियां लिखकर मशहूर हस्तियों और राजनेताओं के दफ्तरों या घरों के बाहर छोड़ दें।

सुरक्षा एजेंसियों ने क्या सलाह दी? 
सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों को सलाह दी है कि वे घबराएं नहीं, और ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत इसकी सूचना दें। एक अधिकारी ने बताया कि ऐसा करने से खतरे को खत्म करने में मदद मिलेगी और यह भी पता चल जाएगा कि यह सिर्फ एक झूठी धमकी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें