जंतर मंतर पर प्रदर्शन करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
वक्फ पर सबसे बड़ी चिंता
वक्फ मामले पर दूसरे पक्ष के लोगों की चिंता यह है कि वक्फ नियमों की आड़ में किसी भी संपत्ति को वक्फ बोर्ड की संपत्ति करार दे दिया जाता है। हाल ही में प्रयागराज में आयोजित हुए महाकुंभ के दौरान एक मौलाना ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि महाकुंभ जिस भूमि पर हो रहा है, वह वक्फ की जमीन है। इसी तरह दक्षिण भारत के हजारों साल पुराने गांवों को अचानक वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित करने से भी विवाद खड़ा हुआ था।
बदलाव से यह होगा लाभ
कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार वक्फ बो्र्ड कानून में उचित बदलाव कर इस तरह के विवादों को हमेशा के लिए समाप्त करना चाहती है। बदलावों में वक्फ की कमेटी में उचित लोगों को जगह देकर वक्फ की संपत्तियों को उचित तरीके से देखभाल करना और इसका लाभ आम मुसलमानों तक पहुंचाना शामिल है। सरकार वक्फ की संपत्तियों का डिजिटल लेनदेन रखने का फॉर्मूला भी तैयार करने का बदलाव प्रस्तावित कर सकती है जिससे किसी गलत दावे के समय सही निर्णय लिया जा सके।
इससे यह लाभ होगा कि वक्फ बोर्ड किसी की संपत्ति को गलत तरीके से कब्जा नहीं कर सकेगा, वहीं दूसरे लोग भी वक्फ की संपत्तियों को कब्जा नहीं कर सकेंगे। इस समय वक्फ बोर्ड की हजारों संपत्तियों पर दूसरे लोगों का कब्जा होने की बात कही जा रही है। नए कानून के बाद इस तरह का कोई कब्जा संभव नहीं होगा।
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