सूत्रों का कहना है कि डीजी की फेयरवेल परेड के लिए सभी जवानों और अफसरों को दो दिसंबर से पहले जीसी गुरुग्राम में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था। सीआरपीएफ अधिकारी, एसओ और अन्य रैंक वाले कर्मी, जिनकी लंबाई 180 सेंटीमीटर होगी, वे ही फेयरवेल परेड में शामिल होंगे। परेड में हिस्सा लेने वाले सहायक कमांडेंट, एसओ और सिपाही, इनकी आयु 30 वर्ष से कम होनी चाहिए। हवलदार की आयु चालीस वर्ष से कम हो। इनका वजन, हाइट के मुताबिक रहे।
जो भी महिला अधिकारी, एसओ और अन्य रैंक में शामिल महिलाएं, फेयरवेल परेड में हिस्सा लेंगी, उनकी हाइट 162 सेंटीमीटर होनी चाहिए। परेड में हिस्सा लेने वाली महिला सहायक कमांडेंट, एसओ और सिपाही, इनकी आयु 30 वर्ष से कम आयु होनी चाहिए। इनके अलावा परेड में हिस्सा लेने वाले हवलदार की आयु 40 वर्ष से अधिक न हो। शरीर का वजन, उनकी हाइट के अनुसार रहे।
खास बात है कि कन्टिन्जन्ट 4, 5 और 6 में उन जवानों को शामिल करने के लिए कहा गया है जो गणतंत्र दिवस 2025 की परेड में हिस्सा लेने वाले दस्ते के लिए चिह्नित हैं। कन्टिन्जन्ट 1 एनएस (महिला) में दो सहायक कमांडेंट, एसओ की संख्या छह रहेगी। अन्य रैंक में 68 कर्मी शामिल होंगे। पहले कन्टिन्जन्ट में कुल 76 अधिकारी/जवान शामिल रहेंगे।
कन्टिन्जन्ट 2 एनएस (आरएएफ) में दो सहायक कमांडेंट होंगे। एसओ की संख्या छह रहेगी। अन्य रैंक में 68 कर्मी शामिल होंगे। कन्टिन्जन्ट 3 एनएस (ट्रेनिंग सेक्टर) में भी दो सहायक कमांडेंट होंगे। एसओ की संख्या छह रहेगी। अन्य रैंक में 68 कर्मी शामिल होंगे। कन्टिन्जन्ट 4 में दो सहायक कमांडेंट होंगे। एसओ की संख्या छह रहेगी। अन्य रैंक में 68 कर्मी शामिल होंगे। कन्टिन्जन्ट 5 में दो सहायक कमांडेंट, छह एसओ व अन्य रैंक में 68 कर्मी शामिल होंगे। कन्टिन्जन्ट 6 में भी दो सहायक कमांडेंट, छह एसओ व अन्य रैंक में 68 कर्मी शामिल होंगे। विदाई परेड में कुल 12 सहायक कमांडेंट, 36 एसओ और 408 अन्य रैंक के कार्मिक रहेंगे। इस तरह से डीजी की विदाई परेड में कुल 456 अधिकारी व जवान हिस्सा लेंगे।
बता दें कि नवंबर 2023 में सीआरपीएफ के महानिदेशक सुजॉय एल. थाउसेन की फेयरवेल परेड की तैयारी शुरु हो गई थी। फेयरवेल परेड 30 नवंबर को गुरुग्राम में स्थित ग्रुप सेंटर पर आयोजित हुई थी। सीआरपीएफ में जंगल वॉरफेयर के एक्सपर्ट 'कोबरा' कमांडो को डीजी की फेयरवेल परेड में शामिल होने के लिए कहा गया। खास बात ये है कि उस वक्त वे कमांडो छुट्टी पर थे। मुख्यालय द्वारा कहा गया कि उन्हें छुट्टी से वापस बुलाया जाए। तब कोबरा सेक्टर हेडक्वार्टर के अधिकारी ने आईजी ट्रेनिंग 'मुख्यालय' से आग्रह किया था है कि कोबरा कमांडो को उनके तय लीव शेड्यूल से बीच में बुला लेना ठीक नहीं होगा। इससे उनके मनोबल पर बुरा असर पड़ सकता है। कोबरा विंग के अधिकारी ने आईजी ट्रेनिंग से पूछा था, क्या कमांडो को 15 अक्तूबर की बजाए, 25 अक्तूबर तक बुलाया जा सकता है। सीआरपीएफ के ट्रेनिंग मुख्यालय ने आदेश दिया था कि 15 अक्तूबर तक कोबरा दस्ते को एकत्रित करें, ताकि वे डीजी को सलामी दे सकें।
सीआरपीएफ डीजी की विदाई परेड की तैयारी एक माह पहले ही शुरु हो जाती है। डीजी, कुलदीप सिंह की फेयरवेल के लिए भी गुरुग्राम में जोरशोर से तैयारी की गई थी। उनका कार्यकाल 30 सितंबर 2022 को खत्म हुआ था। गुरुग्राम स्थित बल के ग्रुप सेंटर पर फेयरवेल परेड के लिए विभिन्न हिस्सों से लगभग 900 जवान और अधिकारियों ने एक सितंबर से पहले ही गुरुग्राम में रिपोर्ट किया था। फेयरवेल परेड में कुल आठ कंटिंजेंट ने '9/9 ब्लॉक फॉरमेशन में हिस्सा लिया था। बल के सैंकड़ों अधिकारी भी ग्रुप सेंटर पर पहुंचे थे। सीआरपीएफ के पूर्व अफसर कहते हैं, ये आयोजन मोदी सरकार की खर्च घटाओं नीति को झटका देता है। डीजी की विदाई पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे। ये पैसा किसी रचनात्मक कार्य पर खर्च नहीं हो रहा। फेयरवेल परेड में बल के अफसरों और जवानों का समय व्यर्थ होगा।
देश में उतार-चढ़ाव वाली आर्थिक स्थिति के मद्देनजर केंद्र सरकार ने अपने कई खर्चों में कटौती की है। दूसरी तरफ सीआरपीएफ महानिदेशक की विदाई परेड, जो 30 दिसंबर को होनी है, उसके लिए एक महीना पहले ही तैयारी शुरु कर दी गई है। सैकड़ों अधिकारी व हजार, ग्रुप सेंटर पर पहुंच चुके हैं। परेड एवं खानपान की व्यवस्था के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से अफसरों और जवानों को बुलाया गया है।
बल के एक पूर्व एडीजी के अनुसार, फोर्स पर इतने बड़े खर्च का भार डालना ठीक नहीं है। विदाई देने का कोई दूसरा तरीका अपनाया जा सकता है। मुख्यालय स्तर पर समारोह आयोजित करने का विकल्प मौजूद है। जो अधिकारी व जवान, इस परेड में शामिल होंगे, एक माह के उनके वेतन व भत्तों का हिसाब लगाएं तो वह करोड़ों में पहुंच जाएगा। जैसे सीआरपीएफ डे पर परेड होती है, अगर उसके आसपास कोई डीजी रिटायर होता है तो उसके लिए परेड हो सकती है। वजह, उस वक्त जवान संबंधित ग्रुप सेंटर पर तैयारी कर रहे होते हैं। ऐसे में वे फेयरवेल परेड का हिस्सा बन सकते हैं। विदाई के लिए स्पेशल परेड आयोजित करने का कोई औचित्य नहीं है।
बल के पूर्व अफसरों का कहना है कि भारत सरकार, वीआईपी संस्कृति को घटाने में लगी है। सीआरपीएफ में डीजी फेयरवेल परेड के नाम पर उसे बढ़ावा दिया जा रहा है। पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी) के मैनुअल के अनुसार, डीजी विदाई परेड के लिए ड्यूटी कमांडेंट रैंक के अधिकारी परेड कमांडर, असिस्टेंट कमांडेंट रैंक के अधिकारी परेड कमांडर होंगे। परेड के लिए कुल तीन कम्पनी की संख्या के बराबर जवान तैनात किए जाएंगे।
सीआरपीएफ, देश के विभिन्न हिस्सों में तैनात है और ऑपरेशनल ड्यूटी पर जवानों की कमी का सामना करना पड़ता है, ऐसे में डीजी विदाई परेड का आयोजन समझ से परे है। इतने अफसरों और जवानों के आवागमन व अन्य व्यवस्थाओं पर आने वाले करोड़ों के व्यय का भार सीआरपीएफ द्वारा ही वहन किया जाएगा। ये खर्च, बल की किसी न किसी मद में गलत तरीके से ही जुड़ेगा।